मंगलवार, 14 मई 2024

सुगंध से जाना

अनायास ही

सुगंध आई,

खिङकी के 

पास से 

गुज़रते हुए ।

भीनी सी

दस्तक देकर

छुप गई..

कुछ देर हुई 

छुपा-छुपी..

फिर सुगंध की

उंगली पकङ ली,

बाहर झुक कर

देखा जो अभी

खिल गई थी

मोगरे की कली,

रात में ही

मानो चाँदनी । 

ख़बर दे रही थी,

अपना परिचय

भेज कर ।

जैसे आदमी की

शख‍्सियत 

सूरत नहीं,

तय करती है सीरत,

ठीक ऐसे ही

सिर्फ़ रुप से नहीं,

फूल की पहचान 

होती है उसकी

सुगंध से ही ।


शुक्रवार, 10 मई 2024

अमलतास की आस


फहराया पीतांबर..

नील गगन के पथ पर

सूर्य रश्मि ले चली

बदली की गगरी

छलकाती स्वर्ण 

हुआ स्वर्णिम पर्व ।


स्वर्ण पत्र वृक्षों पर

झूमते प्रसन्न होकर,

झर रहे पुष्प पीत

अमलतास,सोनमोहर,

मार्ग हुआ आच्छादित 

जैसे पुरे मन की साध।


बिराजे ठाकुर आज,

सुगंधित सकल साज

चंदन पोशाक शोभित 

नैवेद्य,फूल,धूप निवेदित,

झंकृत ह्रदय के तार

अक्षय सेवा-सद्भाव।


पंछी करते कलरव

पवन बहे अति चंचल,

नदी हुई जलतरंग,

पीत पुष्प गुच्छ बिखर

लहर-लहर अविरल 

खे रहे जीवन की नाव


अमलतास के झूमर 

लुटा रहे मुक्त हस्त

स्वर्ण की सहस्र मोहर

बरसे उस की मेहर

भर-भर कर आंचल,

फहरा रहा पीतांबर।


******************************************************

चित्र साभार : श्री करण पति 

 

सोमवार, 6 मई 2024

thank you sister


How do I thank you, Sister ?

My angel in spotless white uniform.


Stepping in to spread nameless cheer,

Stepping out to dismiss all the fear.

Always on duty with a beaming smile

As if she does not have a single care.

She carries all our burdens in her tray.

She watches over us through night and day.

 

How do I thank you, Sister ?

My angel in spotless white uniform.


Her hands work deftly and tirelessly.

Her shoes tap the floor in a hurry.

Her pat on my back so reassuring.

I think about my mother when she is frowning.

Her life is a sermon to those listening

She drilled strength and courage in me. 


How do I thank you, Sister ?

My angel in spotless white uniform.


+++++++++++++++++++++++++++++++++++++++

Pictures from the internet with thanks 

 

रविवार, 5 मई 2024

फूल रहा अमलतास


आजकल यहाँ

तपता है मौसम,

उङती रहती है धूल,

दोपहर बेजान-सी ।

पंछी खोले चोंच

ढूंढते हैं पानी ।

खोजते हुए छाँव

निगाह जिस तरफ़ गई ,

झूमता झूमर देखा

धूप ने तपा-तपा 

ढाला खरा सोना,

बेझिझक बेपरवाह 

मानो मुख पर हो हास,

फूल रहा अमलतास ।


गुरुवार, 2 मई 2024

मताधिकार


अमां यार ! वैसे तो 

हर गली-नुक्कङ पर

विचारों के खोमचे

लगाते हो रोज़ाना !

पान की दुकान पर

देते हो व्याख्यान !

सोफ़े पर विराजमान 

गिनाते हो धङल्ले से

सरकार के कारनामे !

धज्जियाँ उङा देते

विपक्ष की चुटकियों में !

पर जब आया अवसर

अपना वास्तविक मत 

अपना वोट देकर 

प्रकट करने का तो

कहाँ जा छुपे हो छलिया

अपना अमूल्य वोट लेकर ?

कारण अनेक हैं बंधु

कङी धूप से लेकर 

उदासीनता तक,

पर विकल्प एक यही है,

चुनाव करना ज़रुरी है,

वर्ना अधिकार आलोचना का

भी छिन जाएगा फ़ौरन !

मौका बस एक यही है

मत की महत्ता जताने का !

अपनी बात का वज़न 

तुलवाने का भाई मेरे !

ज़रा मैदान में उतरो !

अपने मत से टक्कर दो !

मतदान केंद्र तक आओ !

उपस्थिति दर्ज कराओ !

जागो देश तुम्हारा भी है !

मात्र औपचारिकता नहीं है,

मतदान की ताक़त का

अंदाज़ा अगर नहीं है,

इस बार आज़माओ !

वोट डाल कर आओ !


शनिवार, 27 अप्रैल 2024

श्री राधा भाव भूषित


प्रातः जब वंशी की 

मधुर तान सुनी,

उठ कर देखा

वशीकरण मंत्र यह

फूंका किसने

चैतन्य में

सवेरे-सवेरे ?

कदंब की छाँव में,

अपनी ही धुन में,

वनमाली वासुदेव 

बांसुरी पर जप रहे,

राधा राधा राधा..

शांत स्वर रागिनी

प्राण जगा रही

तृण तृण में,

खिल रही कुमुदिनी, 

समस्त सृष्टि सुन रही,

प्रीति पिरो रही 

मन के मनकों में,

वंशीधर की वंशी हुई 

श्री राधा भाव भूषित ।

 

॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥

कलाकृति : श्री करन पति

आभार सहित 


गुरुवार, 25 अप्रैल 2024

खिला है मोगरा


तुम्हारा तो सुप्रभात न हुआ..

समाचार ही तुम्हें ऐसा मिला !

लेकिन तुम हताश मत होना ।

ये नहीं तो कुछ और होगा,

दूसरा कोई रास्ता मिलेगा ।

खोज लगातार जारी रखना ।

हार कर द्वार बंद मत करना ।

शायद थोङा समय और लगेगा,

अवसर इसी रास्ते से आएगा,

तुम अपनी जगह मुस्तैद रहना ।

देखो यह पौधा कल मुरझा गया था,

आज इस पर खिला है एक मोगरा !