रविवार, 22 फ़रवरी 2026

मातृभाषा


जिस भाषा में पहला शब्द कहा
जिस भाषा को सर्वप्रथम सुना
जिस भाषा में सोचना शुरु किया
जिस भाषा में लिखना सीखा

जिस भाषा ने समझ पैदा की 
जिस भाषा ने मुझे ज़बान दी
जिस भाषा में अपनी बात कही
जिस भाषा में मनमानी की

जिस भाषा में बोलने से पहले
कभी भी सोचना नहीं पङा
जिस भाषा में खूब लङे-झगङे
फिर संधि-प्रस्ताव भी रखा

जिस भाषा में तुकबंदी की
जीने-मरने की कसमें लीं
जिस भाषा में जीवन पढ़ा 
जिस भाषा में सुख-दुख जिया

उस भाषा को मैंने भुला दिया
पर भाषा ने मुझे नहीं छोङा
शब्दकोश साहबी तो चुक गया
संवाद सदा करती रही मातृभाषा



मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

सत्यम शिवम सुंदरम


नीलकंठ महादेव बाघंबर धारी

हरो मन के विकार हे त्रिशूलधारी ।

तुमने विषपान कर हे त्रिपुरारी

जन की पीङा धारण की स्वयं ।

जीव मात्र को दिया पूर्ण संरक्षण

और सम्मान दिया हे पशुपतिनाथ ।

नंदी को माना कुटुंब का सदस्य 

अहर्निश सेवा में किया संलग्न ।

शीष की जटाओं में गंगा की धारण 

धारा का वेग बाँध,धरा का कल्याण।

वासुकि कंठ हार बन सदा ही रहें संग

जोगी की जटाओं में विराजें अर्ध चंद्र ।

रूपा सी ज्योत्सना से जगत समस्त

प्रेरित हो रचता कला, भाव अनुरूप ।

भोलेनाथ मन में हमारे हो शुभ संकल्प 

ध्यान में रहे सदा सत्यम् शिवम् सुंदरम् ।


शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026

श्रीमान गुलाब


ये गुलाब आपके लिए !

लीजिए भई लीजिए!

कोट पर लगाइए!

या जूङे में सजाइए !

ख़िदमत में हैं आपके !

इनका एहतिराम कीजिए!

ये समझ लीजिए..कि ये

फूलों के सरताज गुलाब हैं !

जीते जी हर गुलदान, 

हर बगीचे की शोभा हैं,

दिलफरेब तोहफ़ा हैं ,

खूबसूरती की मिसाल हैं !

उसके बाद भी कमाल हैं !

इत्र बन कर महकते हैं !

तरी पहुँचाते हैं बन गुलकंद !

इनकी तारीफ़ में शेर पढ़े जाते हैं !

इनके बहाने अफ़साने बुने जाते हैं !

जनाब.. ये गुलाब हैं गुलाब !

तरानों, तस्वीरों, कहानियों-किस्सों में

हर दौर में मुस्कुराते नज़र आते हैं !

पुरानी किताबों के पन्नों के बीच भी

किसी की याद में मिल जाते हैं !

सबके चहेते ये गुलाब हैं गुलाब !