पिता जब तकसाथ होते हैं,उनके होने केबारे मेंकौन सोचता है ?जन्म से ही उनसेश्वास का रिश्ता है ।सब कुछ उनकेहोने से होता है ।जब पिता नहीं रहते ।तब उनका न होना,होने की याद दिलाता है ।घर के हर हिस्से में,किस्से में,अहम फ़ैसलों मेंउनका होनासमझ आता है ।दिल कचोटता है ।काश, और वक्त मिलता..पर समय लौटकर नहीं आता है ।नेमप्लेट बदलने से कोईचला नहीं जाता है ।मन में समा जाता है ।पिता कभी छोङ कर नहीं जाते ।पिता को अपने भीतर जिया जाता है ।
नमस्ते namaste
शब्दों में बुने भाव भले लगते हैं । स्याही में घुले संकल्प बल देते हैं ।
सोमवार, 22 जून 2026
पिता का होना
रविवार, 21 जून 2026
क्या तुमने सुना ?
जीवन का आलाप ही
संगीत कहलाया होगा ।
जब नवजात शिशु का
रोना भी मधुर स्वरालाप
था माँ और पिता के लिए।
तब से ही हर ध्वनि में
संगीत सुना संभवत:
मैंने और तुमने ..
चिङियों का चहचहाना
पत्तों की सरसराहट
हवाओं का अस्फुट स्वर
बूँदों का छनकना
जल का कल-कल बहना
बैलों के गले में घंटी का
रह-रह कर हिलना,
कोयल की कुहू-कुहू
चप्पू का चलना
सायरन का बजना
टाइपराइटर का टकटकाना
कीबोर्ड का सरपट दौङना
गली में सामान बेचते
हरकारे का आवाज़ लगाना
लङकियों का खिलखिलाना
बच्चों का शोर मचाना
खुश होकर ताली बजाना,
बादलों का गरजना,
अपने साथी का गुनगुनाना..
नवरस की अभिव्यक्ति
भावनाओं की प्रतिध्वनि
प्रतीत हुए जब भी सुना ।
संगीत चतुर्दिक बिखरा हुआ।
कभी सुना, कभी किया अनसुना ।
जब कभी जीवन गान अधूरा लगा,
ह्रदय के स्पंदन में ध्रुवपद सुना ।
गुरुवार, 18 जून 2026
गाँठ बाँध ली बात
बरस दर बरस गाँठ बाँध ली हर वो बातजो थी सहज, सरस, ह्वदय के निकट,या इसके विपरीत छीन ले गई सब सुख-चैन,और कर गई हठात, मर्म पर कुठाराघात ।करने बैठे एक दिन जो हिसाब-किताब ,एक-एक कर खोली गाँठ तो समझे विज्ञान ।बाँसुरी के छिद्रों में समाई श्वास से उपजे संगीत,चाखो जब गन्ने की गाँठों के बीच भरा रस,तब जानो गाँठ-गाँठ में हो रहा रस का सृजन ।कुछ गाँठें होंगी नीरस, लेखा-जोखा सपाट ।पर गाँठ बाँधी बात आङे वक्त में आती काम ।पल्ले में जैसे गाँठ बाँध अम्मा रखती थीं याद,बाहर जाने पर दो-चार रुपैया रखती थीं साथ,या गुपचुप माँगती रहती थीं मन्नत, मन ही मन ।गठरी में मार के गाँठ सुख-दुख समेटते रहना।यात्रा में साथ रखते हैं ज़रुर.. जैसे चना-चबैनावैसे ही लाज़िमी है,सीख की गिरह बाँधते रहना ।
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