रविवार, 17 मई 2026

सौभाग्यवती भव


वट वृक्ष सरीखा हो तुम्हारा रिश्ता

जङें गहरी हों इतनी थामे रहें सदा 


वरदान सी विराट वट की छत्रछाया 

यम को कर प्रसन्न तत्क्षण वर पाया


गठजोङा अटूट समर्पण-प्रेम का 

सत्यवान ने सावित्री कवच पाया

 

सोमवार, 11 मई 2026

सवाल जवाब


सवाल बहुत थे मेरे पास..

बहुत सवाल पूछे..

जवाब जो मिले,

वो अक्सर धुँधले थे ।

माने सवाल पूछते-पूछते

खुद सवाल बन गए !

कोरे काग़ज़ पर

सिर्फ़ एक प्रश्नचिह्न।

जवाब के बिना

हर सवाल है अधूरा ।

सवाल पर औंधा लटका

कोई कैसे जिए ?

इसलिए..

अब ये भी कर के देखेंगे..

जवाब बन कर जिएंगे । 

 

गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

भक्त वत्सल भगवान


नख पर गिरि गोवर्धन उठा लिया ।

नख से ही हिरण्यकशिपु को तारा ।

ना नर, ना मानव, नृसिंह रुप धरा ।


विराट चट्टान सा खंबे से प्रगट हुआ।

रौद्र स्वरुप ने जग का ह्रदय कंपाया,

प्रह्लाद ने पर करुणामय दर्शन पाया ।


ना दिन था ना रात जब काल आया

न्याय का ऐसा समय हरि ने ठहराया

दिवस रात्रि मध्य संधिकाल आया ।


इस घङी प्रभु आ विराजे देहरी पर ,

दानवराज अर्जित वर का रख मान ,

श्री नर हरि ने किया उसका उद्धार ।


क्षितिज पर मिलते हैं समय के दो छोर

असंभव को संभव कर हे लीलाधर !

निज भक्त प्रह्लाद को दिया करावलंबन ।

 

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चित्र साभार : अंतरजाल