जिसके चेहरे पर मुस्कान है,
तन और मन में साम्य है,
वही वास्तव में धनवान है ।
जिसने दुर्दिन बहुत देखे हैं,
पर उनसे भी कुछ सीखा है,
कटुता नहीं करुणा रोपीं है,
वही वास्तव में धनवान है ।
जिसने जी भर अभ्यास किया,
श्रम से न कभी मुँह फेरा है,
उसने कर्म का मर्म साध लिया,
वही वास्तव में धनवान है ।
श्री सरल सबल संवेदना है ।
आरोग्य संतुलित योग है ,
संतोष-सब्र जिसकी पूँजी है,
वही वास्तव में धनवान है ।
नमस्ते namaste
शब्दों में बुने भाव भले लगते हैं । स्याही में घुले संकल्प बल देते हैं ।
शनिवार, 7 नवंबर 2026
धनवान
शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
घंटी बजाती आई चिट्ठी
सायकिल की घंटी
बजती थी जब
सुबह-सुबह, दूध वाले,
अखबार वाले के आने की
इत्तिला देती थी ।
दोपहर के आसपास
सायकिल की घंटी बजाते
आते थे डाक बाबू..
खाकी यूनिफ़ाॅर्म पहने
खाकी टोपी लगाए,
खाकी बस्ते में लिए
चिट्ठियों के पुलिंदे ।
अंतर्देशीय, पोस्टकार्ड, लिफ़ाफ़े,
मनी ऑर्डर और तार..
संदेसों की राह तकती
आस भरी निगाहें ।
दूर बसे अपनों से मन ही मन
निरंतर बातें करते-करते
कितने पत्र लिख दिए गए होंगे..
कितने भाव मोती बन कर
ढुलके होंगे,
काग़ज़ ने सोख लिए होंगे ..
कितने शब्द उतरे होंगे
काग़ज़ पर अपनी बात कहने..
कौन जाने ?
पर पुरानी दराज़ों में अब भी
मिल जाते हैं हाथ से लिखे ख़त
जिन्हें छू कर और पढ़ कर
याद आ जाती है डाक बाबू की
खाकी वर्दी और दूर से आती
सायकिल की जलतरंगी घंटी ।
चित्र : अंतरजाल से साभार
शनिवार, 15 अगस्त 2026
राखी भेजना भूल न जाना
बहना तीज का सिंधारा तुम्हारा
आज किसी के हाथ है भिजवाया ।
घेवर,मेंहदी,टिकुली,पायल,चूङी,
बोरला और लहरिया साङी धानी,
झुमके छल्लों वाले जो तुम्हें भाते ।
कुछ पौधों के बीज हैं तेरी पसंद के।
बारिश में भीगी अभी नरम है मिट्टी,
अपना लेगी बीज,अभी जो बो दोगी।
वर्षा की बूँदों से सजी हुई है धरती,
काजल से काले बादल घिरें कभी,
घुल-घुल बरखा की लग जाए झङी।
स्मृतियों के मयूर तब पंख फैलाएंगे,
छम-छम करते मेघ मल्हार गाएंगे।
पानी के बुलबुले, बचपन की यादें,
काग़ज़ की नाव जल में तैराएंगे !
झोके दे देकर झूला तुम्हें झुलाऐंगे
गीत पुराने आँखें नम कर जाएंगे ।
काम-काज में लेकिन भूल न जाना
राखी भैया-भाभी को भिजवाना ।
बहन ही नहीं भाई को भी रहती आस
आते-जाते डाकिये पर रहता ध्यान ..
एक लिफ़ाफ़े में राखी, रोली‐अक्षत
साथ रखी चित्रकारी वाली चिट्ठी !
अधिक नहीं दो-चार बातों वाली,
बस हाल-चाल गपशप बेमतलब की ।
लिखावट तुम्हारी बाकी सब कह देती ।
सूत भर का ही तो है भाई-बहन का नाता
राखी के धागों में पिरोया सूत्र रक्षा का ।