बुधवार, 4 मार्च 2026

सदाचार का रंग


वो देखो प्रह्लाद भक्ति में लीन

चारों तरफ़ लगी आग के बीच

निष्ठा का संबल अभय कवच

बाल-बाँका न कर सका ताप


ऐसे हुआ संपन्न होलिका दहन

कुटिलता के अभेद्य अस्त्र-शस्त्र

सरलता के तेज से जाते पिघल

अंततः वरदान भी होता विफल


धूँ-धूँ जलता उद्विग्न जगत सकल

रणभूमि हो अथवा होलिका दहन

अग्नि में निरर्थक हो जाता भस्म

शेष रहता भक्त प्रह्लाद कथा सार

 

रविवार, 22 फ़रवरी 2026

मातृभाषा


जिस भाषा में पहला शब्द कहा
जिस भाषा को सर्वप्रथम सुना
जिस भाषा में सोचना शुरु किया
जिस भाषा में लिखना सीखा

जिस भाषा ने समझ पैदा की 
जिस भाषा ने मुझे ज़बान दी
जिस भाषा में अपनी बात कही
जिस भाषा में मनमानी की

जिस भाषा में बोलने से पहले
कभी भी सोचना नहीं पङा
जिस भाषा में खूब लङे-झगङे
फिर संधि-प्रस्ताव भी रखा

जिस भाषा में तुकबंदी की
जीने-मरने की कसमें लीं
जिस भाषा में जीवन पढ़ा 
जिस भाषा में सुख-दुख जिया

उस भाषा को मैंने भुला दिया
पर भाषा ने मुझे नहीं छोङा
शब्दकोश साहबी तो चुक गया
संवाद सदा करती रही मातृभाषा



मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

सत्यम शिवम सुंदरम


नीलकंठ महादेव बाघंबर धारी

हरो मन के विकार हे त्रिशूलधारी ।

तुमने विषपान कर हे त्रिपुरारी

जन की पीङा धारण की स्वयं ।

जीव मात्र को दिया पूर्ण संरक्षण

और सम्मान दिया हे पशुपतिनाथ ।

नंदी को माना कुटुंब का सदस्य 

अहर्निश सेवा में किया संलग्न ।

शीष की जटाओं में गंगा की धारण 

धारा का वेग बाँध,धरा का कल्याण।

वासुकि कंठ हार बन सदा ही रहें संग

जोगी की जटाओं में विराजें अर्ध चंद्र ।

रूपा सी ज्योत्सना से जगत समस्त

प्रेरित हो रचता कला, भाव अनुरूप ।

भोलेनाथ मन में हमारे हो शुभ संकल्प 

ध्यान में रहे सदा सत्यम् शिवम् सुंदरम् ।