गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

भक्त वत्सल भगवान


नख पर गिरि गोवर्धन उठा लिया ।

नख से ही हिरण्यकशिपु को तारा ।

ना नर, ना मानव, नृसिंह रुप धरा ।


विराट चट्टान सा खंबे से प्रगट हुआ।

रौद्र स्वरुप ने जग का ह्रदय कंपाया,

प्रह्लाद ने पर करुणामय दर्शन पाया ।


ना दिन था ना रात जब काल आया

न्याय का ऐसा समय हरि ने ठहराया

दिवस रात्रि मध्य संधिकाल आया ।


इस घङी प्रभु आ विराजे देहरी पर ,

दानवराज अर्जित वर का रख मान ,

श्री नर हरि ने किया उसका उद्धार ।


क्षितिज पर मिलते हैं समय के दो छोर

असंभव को संभव कर हे लीलाधर !

निज भक्त प्रह्लाद को दिया करावलंबन ।

 

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चित्र साभार : अंतरजाल 

बुधवार, 22 अप्रैल 2026

काम की किताबें


किताबों की कई किस्में

पाई जाती हैं दुनिया में ।

बचपन की रंग-बिरंगे

चित्रों वाली जादुई किताबें !

बारहखङी सिखातीं ।

शब्द ज्ञान करवातीं ..

गिनती सिखातीं ..

फिर आती बारी कहानी

और पहेलियों की ।

विज्ञान के रहस्य समझाती

अंतरिक्ष की सैर कराती ।

साथ-साथ मन में बसती जाती

गुरुवाणी, मानस की चौपाई ।

साहित्य, संस्मरण, शोध ,  

शब्दकोष, संकलन, जीवनचरित ।

लोककथा,संवाद,जासूसी उपन्यास ।

जिल्द में बँधी, काग़ज़ पर छपी,

मनोरंजन और ज्ञान का अंजन लिए 

किताबें ज़िन्दगी भर साथ निभातीं ।


पेंटिंग पिंट्रेस्ट से आभार सहित 

धरा की धानी चूनर


चाहिए यदि छाँव घनी शीतल

चैन से सुस्ताने को कुछ पहर ।

सींचने को जङें मिट्टी का कवच

साफ़ जल से हो कुंआ भरा ।


पीने का पानी हो सर्वत्र पर्याप्त 

भरे हों ताल-तलैया, जलाशय 

नील सरोवर में खिले हों कमल ।

पुष्प नहीं तो औषधीय शैवाल।


समय पर हो बारिश और घाम

मध्य खिले वसंत फिर पतझङ

शरद और शिशिर ऋतु आए,

तो एकजुट हो करें वृक्षारोपण।


चाहे किसी अपने की स्मृति में 

उसकी पसंद का वृक्ष लगाएँ।

या पेङों का साया सर पर रहे,

इसलिए छायादार वृक्ष लगाएँ।


बीज हरियाली का बोएँ और सींचें

धरा की धानी चूनर धनक हो जाए ।