Friday, 23 February 2018

Tuesday, 20 February 2018

कमल के फूल




कुछ बातें 
गड़ती हैं 
कलेजे में ऐसे, 
जैसे शब्द 
बन गए हों शूल ।

और कुछ बातें, 
धीरे - धीरे 
खिलती हैं 
मन के ताल में,
मानो कमल के फूल । 


बातें



बातें 
बीज की तरह होती हैं ।
जो बो दो ,
वही उपजता है 
मन उपवन में ।
इसीलिए तो 
कहीं उगते हैं कैक्टस ,
कहीं बबूल के कांटे ,
कहीं सरसों के खेत लहलहाते ,
कहीं अमर बेल, 
और कहीं खिलते हैं 
दूर दूर तक, 
बेशुमार, 
फूल ही फूल ।   

Friday, 26 January 2018

निराला















एक हुए थे निराला 
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला । 
जिनकी कालजयी रचना, 
राम की शक्ति पूजा, 
शूरवीरों की आराधना, 
अब तक अलख जगाती है ।

एक 
सपूत भारत माता के 
बहादुर सिपाही ये -
कॉर्पोरल ज्योति प्रकाश निराला । 
जिस शूरवीर ने 
कर दिखाया, 
वास्तव में 
कैसे निभाई जाती है 
राम की शक्ति पूजा । 
कैसे चढ़ाया जाता है 
जीवन का नैवेद्य । 
कैसे संपन्न होती है 
देशभक्ति आराधना । 

   

The Acknowledgement Of Sacrifice


Anonymous soldiers
of peace,
Quietly,
Lay down their lives,
Fighting
on the battlefield,
for the freedom
of their country.

Their countrymen
Those who are wise,
from their secure
home's comfort,
close their eyes,
with a condescending sigh,
sipping tea coffee
from a smug mug,
endlessly analyze 
and collectively 
philosophize.

Friday, 19 January 2018

बेटियां

क्यों हो जाती हैं विदा 
घर से बेटियां ?
गुपचुप सोचते हैं सदा 
दुनिया भर के पिता ।

सूना हो जाता है आँगन सारा,
जब-जब चली जाती है बिटिया ।  
कोई नहीं रखता ध्यान इतना,
बिना कहे जितना करती हैं बेटियां ।

घर आते ही पानी का गिलास देना ।
सामान का थैला हाथ से ले लेना ।
बटुआ और चश्मा ढूंढ कर देना ।
पैंट-कमीज़ प्रेस कर रख देना ।
दवा हाथ में ला कर दे देना ।
घर भर में चिड़िया-सा चहचहाना ।
बहुत मन दुखाता है उसका चले जाना ।

जनम भर की कमाई  . . अपनी बिटिया दे देना ।
इसे ही कन्यादान कहते हैं ना ? 

पाल-पोस कर बड़ा करना,
और दूसरे घर भेज देना ।
अपने कलेजे का टुकड़ा ,
किसी और को सौंप देना ।

अच्छे संस्कार अपनी बिटिया को देना ।
उसे इसी पूँजी से घर बसाते देखना ।
या एकाकी दीपशिखा-सी स्वावलंबी बनते देखना ।
पिता के आशीर्वाद का सम्मान है ना ?
पिता की नम आँखों का स्वाभिमान है ना ?

बस कभी-कभी जब जगह पर नहीं मिलता  . . 
चश्मा  . . दवा  . . मफ़लर या बटुआ  . . 
बहुत - बहुत याद आती है बिटिया ।      
         

Sunday, 14 January 2018

नमस्ते