बुधवार, 4 मार्च 2026

सदाचार का रंग


वो देखो प्रह्लाद भक्ति में लीन

चारों तरफ़ लगी आग के बीच

निष्ठा का संबल अभय कवच

बाल-बाँका न कर सका ताप


ऐसे हुआ संपन्न होलिका दहन

कुटिलता के अभेद्य अस्त्र-शस्त्र

सरलता के तेज से जाते पिघल

अंततः वरदान भी होता विफल


धूँ-धूँ जलता उद्विग्न जगत सकल

रणभूमि हो अथवा होलिका दहन

अग्नि में निरर्थक हो जाता भस्म

शेष रहता भक्त प्रह्लाद कथा सार

 

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