शब्दों में बुने भाव भले लगते हैं । स्याही में घुले संकल्प बल देते हैं ।
वट वृक्ष सरीखा हो तुम्हारा रिश्ताजङें गहरी हों इतनी थामे रहें सदा
वट वृक्ष सरीखा हो तुम्हारा रिश्ता
जङें गहरी हों इतनी थामे रहें सदा
वरदान सी विराट वट की छत्रछाया यम को कर प्रसन्न तत्क्षण वर पाया
वरदान सी विराट वट की छत्रछाया
यम को कर प्रसन्न तत्क्षण वर पाया
गठजोङा अटूट समर्पण-प्रेम का सत्यवान ने सावित्री कवच पाया
गठजोङा अटूट समर्पण-प्रेम का
सत्यवान ने सावित्री कवच पाया
स्त्री का प्रेम, समर्पण और विश्वास से ही परंपराओं की जड़ सीचिंत होती है।सुंदर अभिव्यक्ति।सादर।------- नमस्ते,आपकी लिखी रचना मंगलवार १९ मई २०२६ के लिए साझा की गयी हैपांच लिंकों का आनंद पर...आप भी सादर आमंत्रित हैं।सादरधन्यवाद।
सत्यवान-सावित्री कथा के संदर्भ के साथ कम शब्दों में गहरी बात कह दी आपने
वाह!!!वट सावित्री पर सुन्दर सृजन।
सुंदर
वट सावित्री के पावन पर्व पर सुंदर उद्गार
बहुत ही सुन्दर रचना
बहुत सुंदर
सुन्दर रचना
बहुत खूब ... चन्द लाइनों में इस अप्रतिम प्रेम को उतार दिया ...
कुछ अपने मन की भी कहिए
स्त्री का प्रेम, समर्पण और विश्वास से ही परंपराओं की जड़ सीचिंत होती है।
जवाब देंहटाएंसुंदर अभिव्यक्ति।
सादर।
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नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार १९ मई २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
सत्यवान-सावित्री कथा के संदर्भ के साथ कम शब्दों में गहरी बात कह दी आपने
जवाब देंहटाएंवाह!!!
जवाब देंहटाएंवट सावित्री पर सुन्दर सृजन।
सुंदर
जवाब देंहटाएंवट सावित्री के पावन पर्व पर सुंदर उद्गार
जवाब देंहटाएंबहुत ही सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंसुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंबहुत खूब ... चन्द लाइनों में इस अप्रतिम प्रेम को उतार दिया ...
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