रविवार, 17 मई 2026

सौभाग्यवती भव


वट वृक्ष सरीखा हो तुम्हारा रिश्ता

जङें गहरी हों इतनी थामे रहें सदा 


वरदान सी विराट वट की छत्रछाया 

यम को कर प्रसन्न तत्क्षण वर पाया


गठजोङा अटूट समर्पण-प्रेम का 

सत्यवान ने सावित्री कवच पाया

 

8 टिप्‍पणियां:

  1. स्त्री का प्रेम, समर्पण और विश्वास से ही परंपराओं की जड़ सीचिंत होती है।
    सुंदर अभिव्यक्ति।
    सादर।
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    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार १९ मई २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  2. सत्यवान-सावित्री कथा के संदर्भ के साथ कम शब्दों में गहरी बात कह दी आपने

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  3. वाह!!!
    वट सावित्री पर सुन्दर सृजन।

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  4. वट सावित्री के पावन पर्व पर सुंदर उद्गार

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