सवाल बहुत थे मेरे पास..
बहुत सवाल पूछे..
जवाब जो मिले,
वो अक्सर धुँधले थे ।
माने सवाल पूछते-पूछते
खुद सवाल बन गए !
कोरे काग़ज़ पर
सिर्फ़ एक प्रश्नचिह्न।
जवाब के बिना
हर सवाल है अधूरा ।
सवाल पर औंधा लटका
कोई कैसे जिए ?
इसलिए..
अब ये भी कर के देखेंगे..
जवाब बन कर जिएंगे ।
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