रविवार, 17 मई 2026

सौभाग्यवती भव


वट वृक्ष सरीखा हो तुम्हारा रिश्ता

जङें गहरी हों इतनी थामे रहें सदा 


वरदान सी विराट वट की छत्रछाया 

यम को कर प्रसन्न तत्क्षण वर पाया


गठजोङा अटूट समर्पण-प्रेम का 

सत्यवान ने सावित्री कवच पाया

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कुछ अपने मन की भी कहिए