ख़बर
हाँ.
तुम्हारा
ईमेल मिला.
तुम्हारा
ख़त मिला.
फ़ोन पर
झटपट
बात भी हुई.
इक्का-दुक्का
मुलाक़ात भी हुई.
पर
तुम्हारी
कोई
ख़बर नहीं मिली.
nupuram@gmail.com
बुधवार, 30 जून 2010
बुधवार, 9 जून 2010
सोमवार, 7 जून 2010
Old Age
Old age
is such a sweet
and sad thing
at once.
Sweet in
listening patiently ..
so protective and loving ..
and above all
forgiving.
Sad in
depending upon others
who do not have the patience
or the time
to pay attention
to their childlike
whims and fancies.
noopurbole.blogspot.com
Old age
is such a sweet
and sad thing
at once.
Sweet in
listening patiently ..
so protective and loving ..
and above all
forgiving.
Sad in
depending upon others
who do not have the patience
or the time
to pay attention
to their childlike
whims and fancies.
noopurbole.blogspot.com
ज़िम्मेदार कौन है ?
इस दुनिया में
दो तरह के
लोग होते हैं .
एक वो
जो देने की हैसियत रखते हैं,
दूसरे वो
जो ज़रूरतमंद होते हैं .
एक वो
जो हुकूमत करते हैं ,
दूसरे वो
जो हुक्म बजाते हैं .
हैसियत रखने वाले
हुकूमत करने वाले
नचाते हैं
जिस दुनिया को
लट्टू की तरह,
वो दुनिया
चलती है
हुनरमंद और ज़रूरतमंद के
बल पर .
है ना मज़े की बात ये ?
ज़िम्मेदार कौन है इसके लिए ?
noopurbole.blogspot.com
इस दुनिया में
दो तरह के
लोग होते हैं .
एक वो
जो देने की हैसियत रखते हैं,
दूसरे वो
जो ज़रूरतमंद होते हैं .
एक वो
जो हुकूमत करते हैं ,
दूसरे वो
जो हुक्म बजाते हैं .
हैसियत रखने वाले
हुकूमत करने वाले
नचाते हैं
जिस दुनिया को
लट्टू की तरह,
वो दुनिया
चलती है
हुनरमंद और ज़रूरतमंद के
बल पर .
है ना मज़े की बात ये ?
ज़िम्मेदार कौन है इसके लिए ?
noopurbole.blogspot.com
तलब
सिखाने से
कोई कुछ नहीं
सीखता .
अनुभव
जब चढ़ाता है सान पर
आदमी को ,
तराशता है तेज़ धार पर
ज़िंदगी को,
तब
सीखने की तलब होती है .
ये तलब
सिखाती है
आदमी को
जीना .
सिखाने से
कोई कुछ नहीं
सीखता.
अनुभव सिखाता है जीना.
noopurbole.blogspot.com
सिखाने से
कोई कुछ नहीं
सीखता .
अनुभव
जब चढ़ाता है सान पर
आदमी को ,
तराशता है तेज़ धार पर
ज़िंदगी को,
तब
सीखने की तलब होती है .
ये तलब
सिखाती है
आदमी को
जीना .
सिखाने से
कोई कुछ नहीं
सीखता.
अनुभव सिखाता है जीना.
noopurbole.blogspot.com
मंगलवार, 9 मार्च 2010
सौ रुपये का एक नोट
एक दिन
तुम्हें देखा था
चुपचाप अपना
काम करते
लगन से ..
और बहुत अच्छा लगा था.
तुम्हारी छोटी-छोटी बातों से
निश्छल चुहलबाज़ियों से
एक अनबूझा
नाता जुड़ गया था.
फिर एक दिन
तुमने पूछा था -
मुझे अपना रास्ता
चुनना है ..
या तो हवा का झोंका
बन कर
खुले आसमान में
उड़ना है,
या फिर
दरख़्त बन कर
तेज़ हवाओं से
जूझना है.
मुझे पता है आप
ये नहीं बताएंगी
कि क्या करना है,
पर मुझे आपसे सुनना है
कि आपको क्या लगता है ?
हवा से बातें करना
और हवा के साथ बहना,
इन दोनों के
मायने हैं क्या ?
मेरे लिए ज़रूरी है जानना
कि मुझे रास आएगा
कौनसा रास्ता ?
जवाब तो मुझे भी नहीं था पता,
और तुमने ये प्रश्न पूछा भी नहीं था.
मुझे क्या आता था तुम्हें समझाना ?
बस मुझे तुम पर था इतना भरोसा
और मन था कहता ..
पच्छिमी और पुरबिया हवाओं का
लेखा-जोखा रखना
बहुतों को आता होगा,
पर तुम्हें जो ईश्वर ने हुनर है दिया,
वही तुम्हारी तदबीर और तक़दीर बनेगा.
मन जो कहता था कह दिया,
और तुमने भी समझ लिया.
अपनी खूबी पर भरोसा किया,
और अपना फैसला खुद किया.
पंछी को सबसे अच्छी तरह
आता है उड़ना
और तुमको था पसंद हमेशा,
अपनी आवाज़ से
बाज़ीगर का खेल रचाना,
बातें करना,
सबको हंसाना.
फिर एक दिन ऐसा भी आया
मेहनत के बल पर तुमने
अपना छोटा-सा मक़ाम बनाया.
.. अच्छा लगता है जब
काम में बेहद मसरूफ़
तुम्हारे पास वक़्त ही नहीं होता
किसी और बात के लिए.
तुम्हारी ज़िद है बस..
दिन रात
सीखना और.. सीखना.
.. अच्छा लगता है.
और फिर एक दिन तुम्हें
सामने खड़ा पाया.
क्या दूं और क्या कहूँ तुमसे
कुछ भी समझ ना आया.
इतने में तुमने हाथ में
एक सौ का नोट थमाया
और बस इतना बताया ..
नए काम की पहली तनख्वाह से
आपके लिए ..
आपके लिए और भैय्या - भाभी के लिए ..
आशीर्वाद दीजिये.
इतना सब करना
तुम्हें याद रहा !
और तो किसी ने कभी
ऐसा नहीं किया !
तुमने ये सब कैसे सोचा ?
सबको नहीं आता,
स्नेह और आशीष का
मान रखना.
तुम सदा ऐसे ही रहना.
मन जो माने वही करना.
मेहनत सतत करते रहना.
और सीधी राह चलना.
सोच कर जाने क्या
तुमने ऐसा किया ..
तुम्हारी भावना ने बाला
मंदिर के आले में दिया.
जब जब मन को
लगेगी ठेस,
जब जब स्वाभिमान पर
होगी चोट,
बहुत काम आएगा
सौ रुपये का एक नोट.
noopubole.blogspot.com
एक दिन
तुम्हें देखा था
चुपचाप अपना
काम करते
लगन से ..
और बहुत अच्छा लगा था.
तुम्हारी छोटी-छोटी बातों से
निश्छल चुहलबाज़ियों से
एक अनबूझा
नाता जुड़ गया था.
फिर एक दिन
तुमने पूछा था -
मुझे अपना रास्ता
चुनना है ..
या तो हवा का झोंका
बन कर
खुले आसमान में
उड़ना है,
या फिर
दरख़्त बन कर
तेज़ हवाओं से
जूझना है.
मुझे पता है आप
ये नहीं बताएंगी
कि क्या करना है,
पर मुझे आपसे सुनना है
कि आपको क्या लगता है ?
हवा से बातें करना
और हवा के साथ बहना,
इन दोनों के
मायने हैं क्या ?
मेरे लिए ज़रूरी है जानना
कि मुझे रास आएगा
कौनसा रास्ता ?
जवाब तो मुझे भी नहीं था पता,
और तुमने ये प्रश्न पूछा भी नहीं था.
मुझे क्या आता था तुम्हें समझाना ?
बस मुझे तुम पर था इतना भरोसा
और मन था कहता ..
पच्छिमी और पुरबिया हवाओं का
लेखा-जोखा रखना
बहुतों को आता होगा,
पर तुम्हें जो ईश्वर ने हुनर है दिया,
वही तुम्हारी तदबीर और तक़दीर बनेगा.
मन जो कहता था कह दिया,
और तुमने भी समझ लिया.
अपनी खूबी पर भरोसा किया,
और अपना फैसला खुद किया.
पंछी को सबसे अच्छी तरह
आता है उड़ना
और तुमको था पसंद हमेशा,
अपनी आवाज़ से
बाज़ीगर का खेल रचाना,
बातें करना,
सबको हंसाना.
फिर एक दिन ऐसा भी आया
मेहनत के बल पर तुमने
अपना छोटा-सा मक़ाम बनाया.
.. अच्छा लगता है जब
काम में बेहद मसरूफ़
तुम्हारे पास वक़्त ही नहीं होता
किसी और बात के लिए.
तुम्हारी ज़िद है बस..
दिन रात
सीखना और.. सीखना.
.. अच्छा लगता है.
और फिर एक दिन तुम्हें
सामने खड़ा पाया.
क्या दूं और क्या कहूँ तुमसे
कुछ भी समझ ना आया.
इतने में तुमने हाथ में
एक सौ का नोट थमाया
और बस इतना बताया ..
नए काम की पहली तनख्वाह से
आपके लिए ..
आपके लिए और भैय्या - भाभी के लिए ..
आशीर्वाद दीजिये.
इतना सब करना
तुम्हें याद रहा !
और तो किसी ने कभी
ऐसा नहीं किया !
तुमने ये सब कैसे सोचा ?
सबको नहीं आता,
स्नेह और आशीष का
मान रखना.
तुम सदा ऐसे ही रहना.
मन जो माने वही करना.
मेहनत सतत करते रहना.
और सीधी राह चलना.
सोच कर जाने क्या
तुमने ऐसा किया ..
तुम्हारी भावना ने बाला
मंदिर के आले में दिया.
जब जब मन को
लगेगी ठेस,
जब जब स्वाभिमान पर
होगी चोट,
बहुत काम आएगा
सौ रुपये का एक नोट.
noopubole.blogspot.com
सोमवार, 8 मार्च 2010
सुनो
चलते रहो.
टूटी-फूटी सड़क,
धूल भरी पगडंडी,
एक-एक कर
पार करते रहो.
एक ना एक दिन
वो रास्ता भी आयेगा,
जहां हर तरफ़ होगी
हरियाली
और फूल ही फूल.
चलते रहो.
टूटी-फूटी सड़क,
धूल भरी पगडंडी,
एक-एक कर
पार करते रहो.
एक ना एक दिन
वो रास्ता भी आयेगा,
जहां हर तरफ़ होगी
हरियाली
और फूल ही फूल.
सदस्यता लें
संदेश (Atom)

