बुधवार, 27 मार्च 2019

बूंद


तुम सरल 
जल की बूंद,
ओस की बिंदी,
अश्रु का मोती,
निश्छल पारदर्शी ।

क्षणभंगुर ..
पर अमिट
पावन स्मृति
क्षीर सम ।

सूर्य रश्मि का
परस पाकर
बन जाती
पारसमणि ।

तुम कहीं
जाती नहीं ।
विलय होती ।
बन जाती
अंतर्चेतना।

सहसा
समा जाती,
सहृदय
पुष्प की
पंखुरियों में ।

तुम निरी
इक बूंद !

बूंद में ही
खिलता
सजल सतरंगी
इंद्रधनुष ।





रविवार, 24 मार्च 2019

ताक़त


कड़वे अनुभवों की 
खर-पतवार को
सोच की
उपजाऊ ज़मीन पर
जड़ें मत फैलाने देना ।
इनकी कड़वाहट 
जंगली बेल की तरह
तेज़ी से चारों तरफ़
फैल कर जकड़ लेती हैं ।
अच्छे ख़यालात को
पनपने नहीं देती ।

इसलिए हो सके तो
नियम से इन्हें
उखाड़ फेंको ।
अगर कुछ करना है ।
अगर कुछ पाना है ।
तो बहुत देर तक
कटुता को
टिकने मत देना ।
दफ़ा कर देना ।

दुखी करने वाला
हर वाक़या
कुछ सिखाने आता है ।

सीखना और दुख को
अपनी ताक़त बना लेना ।