रविवार, 24 मार्च 2019

ताक़त


कड़वे अनुभवों की 
खर-पतवार को
सोच की
उपजाऊ ज़मीन पर
जड़ें मत फैलाने देना ।
इनकी कड़वाहट 
जंगली बेल की तरह
तेज़ी से चारों तरफ़
फैल कर जकड़ लेती हैं ।
अच्छे ख़यालात को
पनपने नहीं देती ।

इसलिए हो सके तो
नियम से इन्हें
उखाड़ फेंको ।
अगर कुछ करना है ।
अगर कुछ पाना है ।
तो बहुत देर तक
कटुता को
टिकने मत देना ।
दफ़ा कर देना ।

दुखी करने वाला
हर वाक़या
कुछ सिखाने आता है ।

सीखना और दुख को
अपनी ताक़त बना लेना ।


बुधवार, 20 मार्च 2019

गौरैया खूब चहको तुम




नन्ही गौरैया आओ तुम ।
अपना घर बसाओ तुम ।

मेरे छोटे-से घर की
छत का कोना, खिड़की,
बालकनी, दुछत्ती, अहाता,
सब बाट जोहते हैं तुम्हारी ।

यहाँ घोंसला बनाओ ।
दिन भर दाना चुगो ।
प्यास लगे तो पानी पियो ।
ये सब यहाँ मिलेगा ।
और प्यार मिलेगा ।
ज़्यादा कुछ नहीं,
देने को
हमारे पास भी ।
तुम्हें भी तो
चाहिए बस इतना ही ।

तुम्हारा रहना आसपास
होता है शुभ ।
तुम चहचहाती हो जब,
चहकने लगता है जीवन ।




गौरैया के घर की चित्रकारी : श्रीमती रेखा शांडिल्य