सीमा पर फ़ौजी तो
हमेशा ही तैनात रहा।
क्या हमें भी अपने
कर्तव्य का भान रहा ?
युद्ध
हर जगह चल रहा है।
युद्ध
हर कोई लड़ रहा है।
कोई सीमा का प्रहरी है।
कोई घर में युद्ध बंदी है।
युद्ध की कोई
सीमा है क्या ?
युद्ध की कोई
गरिमा है क्या ?
भीतर हम सबके
एक लक्ष्मण रेखा है।
अपने सिवा इसे
किसी ने नहीं देखा है।
लेकिन हम सबको पता है.
रावण क्यों बुरा है।
सीमा पर जब जवान
जान हथेली पर लिए
लड़ रहा है ..
जवान का परिवार
अपनी भावनाओं से
जूझ रहा है ..
देश के
हर नागरिक की भूमिका,
कृतज्ञ हो कर,
धैर्य धर यह सोचना ..
मुझे क्या करना है ?
मुझे क्या करना है ?
कैसे सेना के त्याग का
अभिनन्दन करना है ?
हमको अपने-अपने बल पर,
अपने-अपने मोर्चे पर
रोज़ एक युद्ध लड़ना है।
रोज़ एक युद्ध जीतना है।
अंदरूनी ताक़त से
ज़िम्मेदार भारत
बने रहना है।
दृढ़ संकल्प और मेहनत से,
खुशहाल भारत गढ़ना है.
आज बड़े दिनों बाद
दिलों में जोश आया है।
अर्जुन ने आज फिर
गांडीव उठाया है।
आज हवाओं ने झूम कर
फ़ख्र का परचम लहराया है।
आज नभ में शौर्य का
प्रखर सूर्य जगमगाया है।
बारह रणवीरों ने आज
अभय का कर शंखनाद
आतंक को ललकारा है !
शठता को पछाड़ा है।
जननी जन्मभूमि का,
माँ भारती के अश्रुजल का,
अपनी माँ के दूध का
क़र्ज़ उतारा है।
देश सेवा में जिस-जिसने
जीवन का बलिदान किया,
हर उस सेनानी का
मान बढ़ाया है।
आज बड़े दिनों के बाद
शहीदों के अपनों को
थोड़ा चैन आया है।
एक आंसू ढुलक आया है।
आज बड़े दिनों बाद
दिलों में जोश आया है।
अर्जुन ने आज फिर
गांडीव उठाया है।
जब तक होश है।
रग-रग में जोश है।
जिगर में
जोश के बुलबुले नहीं ,
जोश के जुगनू भी नहीं
जो पलक झपकने तक ही
मौजूद रहें।
ये जो
कौंधता है
मेरे वजूद में ,
बिजली की तरह . .
ये बरसों की तपस्या है।
ठोकर खा-खा कर जो संभला है,
आग में तप कर जो निखरा है,
वो फ़ौलादी हौसला है।
ये वीरता का अखंड दिया है।
जो अलख जगाने वाला है।
तिरंगे की सौगंध है।
माँ से बच्चों का वादा है।
दुष्टता का शत्रु है।
मानवता का मित्र है।
जब तक होश है।
रग रग में जोश है।