फसल कटी है !
खुशी की घङी है !
बहुत दिनों बाद
भूले सुर आए याद !
धन-धान्य से
भरें भंडार !
खाने को मिले
पेट भर ।
आज है त्यौहार ।
कल फिर आएगा
बीज बोने किसान ।
शुरु होगा काम ।
अन्न ब्रह्म देवता
रहें श्रम से प्रसन्न ।
वरद हस्त हो
कला साहित्य पर ।
मिट्टी से जुङे रहें ।
फूलों की तरह खिलें ।
अपनों का साथ रहे ।
जो भी हो, खुश रहें ।
आमीन! आपकी सभी सदिच्छाओं को मूर्त रूप मिले, यही मंगलकामना है।
जवाब देंहटाएंताज़गी से भरी नई शुरुआत! sundar
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 15 अप्रैल 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंअथ स्वागतम शुभ स्वागतम।
वाह!! सदिच्छाओं से पूर्ण सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर कामनाएँ..,सभी इच्छाएँ फलीभूत हो !हार्दिक अभिनंदन नुपूरं जी !
जवाब देंहटाएंसुंदर
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