गोबर से लीप कर
तैयार की गई भित्ती पर
खङिया और लाल मिट्टी से
जीवन के प्रतीक चित्र
उकेरती स्त्री सबसे अनूठी
कलाकार है ।
उसने जो देखा वही
अपना लिया ।
जो जिया उसे ही
गोल, चौकोर,सीधी
और कभी घुमावदार
रेखाओं में उतार दिया ।
रंग तो दो ही थे, उनसे ही
अद्भुत रचना कर दी ..
मिट्टी पर बनी आकृतियाँ
सजीव हो उठीं , गीत गाती
गुनगुनाती छवि से उसकी
मैत्री है चिरंजीवी ।
घर के काम-धाम निबटा कर,
दोपहरी जब पसर जाती,
वो खूब बतियाती
अपने रचे मोर, गौरैया, हंस,
खेत, दालान, कुँए की जगत,
नदी, तालाब, जामुन का पेङ,
कुटिया, बकरी, गाय, कुकुर,
जीवन के सारें संदर्भों को
उंगलियों के पोरों से महसूस करती
अपनी भित्ती पर चित्रित कर,
अनुभव के आङे-तिरछे खानों को
अपनी समझ के सौंधे रंगों से भर देती ..
उसकी कला है कालजयी ।
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छवि : अंतरजाल से साभार
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