जो कला, संस्कृति, परंपरा,सृजन
स्मृति में चिन्हित हो चुका है,
हमारा परिचय बन चुका है,
सदियों से समय के झंझावत
झेल कर भी टिका हुआ है,
वह हमारी अमूल्य धरोहर है ।
हमारे अस्तित्व का शिलालेख है ।
इतिहास से परे यह वो नाता है,
जो बिना कोई नाम दिए भी
हमसे जुङा है..हमारे साथ ही
चल रहा है अपनी छाप छोङता
समृद्ध हो रहा है ,आकार ले रहा है ।
सभ्यता की इस कथा का अंत नहीं होता ।
सहेज कर रखी जाती है धरोहर अवचेतन में
जब तक सौंप न दिया जाए भावी पीढ़ियों को,
तब तक पोषित करनी है, जीवन की हर विधा।
साहित्य, नृत्य, संगीत, स्थापत्य कला, संवाद
जो नदी और पर्वत श्रृंखला की तरह है स्थायी
राग जीवन का, वो सब कुछ जिसे हम कह सकें,
नि:संकोच, गौरव से सदा, अपनी धरोहर अक्षया ।
शनिवार, 18 अप्रैल 2026
अक्षय धरोहर
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