मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

नूतन वर्ष फले-फूले


फसल कटी है !

खुशी की घङी है !

बहुत दिनों बाद

भूले सुर आए याद !


धन-धान्य से 

भरें भंडार !

खाने को मिले 

पेट भर ।


आज है त्यौहार ।

कल फिर आएगा

बीज बोने किसान ।

शुरु होगा काम ।


अन्न ब्रह्म देवता

रहें श्रम से प्रसन्न ।

वरद हस्त हो

कला साहित्य पर ।


मिट्टी से जुङे रहें ।

फूलों की तरह खिलें ।

अपनों का साथ रहे ।

जो भी हो, खुश रहें ।


2 टिप्‍पणियां:

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