दिन जैसे जैसे खूब तपने लगेफूलों के रंग चटख होने लगेझूमर से झूमते अमलतास फूलेरास्तों के किनारे सोनमोहर बिछेछज्जे-छज्जे पर बोगनवेलिया लगेमजाल है कि कोई भी रंग छूट जाएहर मील के पत्थर पर प्याऊ बनेमिट्टी के घङे का शीतल जल मिलेरास्तों को घने वृक्षों का साया मिलेराहगीर को चलने का हौसला मिले
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