Wednesday, 3 November 2021

सूरज के सिपाही



कुम्हार के चाक पर 
मिट्टी और नमी से 
गढ़े गए हैं हम ।
मिट्टी के दिये हैं हम।

बच्चों की हठ पर 
हाट-बाज़ार से 
खरीदे गए हैं हम ।
मिट्टी के दिये हैं हम ।

कल्पना के मुखर
कच्चे-पक्के रंगों से 
जी भर रंगे गए हैं हम ।
मिट्टी के दिये हैं हम ।

अपनी ज़मीन पर
काजल की कोठरी में 
तन कर डटे हैं हम ।
मिट्टी के दिये हैं हम ।

छोटा है क़द पर
सूरज की रोशनी से 
लौ लगाते हैं हम ।
मिट्टी के दिये हैं हम ।

दिन के छुपने पर
दिनकर की किरणों के 
पैदल सिपाही हैं हम ।
मिट्टी के दिये हैं हम ।

छोटे ही सही पर
बङे-बङे तूफ़ानों से
टकरा जाते हैं हम ।
मिट्टी के दिये हैं हम ।

नभ के छत्र पर पैबंद
धरा पर जगमग सितारे 
छोटी-सी उम्मीद हैं हम ।
मिट्टी के दिये हैं हम ।

अलाव की आंच पर
धीमे-धीमे सुलगते 
टिमटिमाते हौसले हैं हम ।
मिट्टी के दिये हैं हम ।

13 comments:

  1. बहुत ही खूबसूरत

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    1. ज्योति पर्व मंगलमय हो ।
      धन्यवाद,ओंकार जी ।

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  2. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" शुक्रवार 05 नवम्बर 2021 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आदरणीया यशोदा जी, दीपोत्सव पर मंगल शुभकामनाएं.
      सादर धन्यवाद. लिंक हो कर आनंदित हुए !

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  3. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (05 -11-2021 ) को 'अपने उत्पादन से अपना, दामन खुशियों से भर लें' (चर्चा अंक 4238) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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    1. हार्दिक आभार, रवीन्द्र जी. दीपोत्सव पर मंगल शुभकामनाएं.
      विषय बहुत दिलचस्प है. चर्चा चलती रहे. सम्भावनाओं के द्वार खुलते रहें.

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    1. शुक्रिया ! नमस्ते.
      दीपावली शुभ हो.

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  5. बहुत बहुत सुन्दर

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    1. धन्यवाद,आलोक जी ।
      आपके नाम का आलोक आपके जीवन को आलोकित करे सदा ।

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  6. Replies
    1. Long time..thank you.
      राजा नहीं, न सही ।
      पैदल सेना तो हो ही सकते हैं ।
      हम सब ।

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  7. बहुत गहरी ... भावपूर्ण रचना है ...

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