Tuesday, 13 April 2021

आनंद संवत्


अलविदा २०७७ 
आ ही गया तुम्हारे
अस्त होने का समय ।
बहुत कष्ट पाया तुमने ।
अलग-थलग सबसे विलग
मौन हो गए और हो गए विलय
नवागन्तुक प्रहर की लहर में विलीन ।
अब मिलना होगा नव संवत्सर की चौखट पर ।
सुना है,अब जो आओगे पोटली में होंगे सुदामा के चावल।
मित्रवत स्वागत तुम्हारा हृदय तल से करेंगे सकल जन सहर्ष ।
करतल ध्वनि कर समवेत स्वर में करेंगें शिव तत्व का आह्वान ।
धैर्य और धर्म धारण कर परिवर्तन  लाए नव विकम संवत्सर २०७८ ।
आरोग्य उपहार मिले,उर में आनंद का हो आगमन,नूतन वर्षाभिनंदन ।


12 comments:

  1. आनंद नाम संवत्सर आनंद प्रद हो। अस्तु

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" ( 2099...कभी पछुआ बहे तो कभी पुरवाई है... ) पर गुरुवार 15अप्रैल 2021 को साझा की गई है.... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. हमारी प्रार्थना मातारानी तक पहुंचे यही कामना है
    आपको भी नववर्ष और नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये आपको

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  4. बहुत सुन्दर

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  5. नववर्ष सभी के लिए प्रगति के उल्लास से आलोकित हो

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  6. मित्रवत स्वागत तुम्हारा हृदय तल से करेंगे सकल जन सहर्ष ।
    करतल ध्वनि कर समवेत स्वर में करेंगें शिव तत्व का आह्वान
    बहुत सुन्दर भाव!

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  7. आपकी प्रार्थना फलीभूत हो 🙏

    सुंदर कविता के लिए बधाई

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  8. आपकी सुंदर कामना और प्रार्थना सभी के जीवन को सुख और शांति देगी । यही आशा और विश्वास है,सादर ।

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