Tuesday, 26 January 2021

जन गण मन प्रतिबद्ध

जन्मभूमि के लिए 
जो जिये और मरे,
उनका अनुकरण 
कर पाएं हम ..
साहस का उनके 
कर वरण,
नित करें स्मरण 
और वंदन ।

शहीदों और वीरों के
बलिदान का हर क्षण,
अमिट छाप छोङे
जन मानस पर ।

जो न्योछावर हुए 
देश की माटी पर,
उन पर न्योछावर 
देश की धङकन ।

श्वास श्वास कृतज्ञ
शत शत नमन,
सदा सेवा में सजग
सज्ज रहें जन गण मन ।


19 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (27-01-2021) को  "गणतंत्रपर्व का हर्ष और विषाद" (चर्चा अंक-3959)   पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    1. सुप्रभात शास्त्री जी । धन्यवाद ।
      कल के घटनाक्रम से स्तब्ध और हतप्रभ है मन ।

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    1. जय हिंद ।
      शुक्रिया,गगन जी ।

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  3. सुंदर सृजन

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  4. सुंदर सृजन।
    जय जवान ।

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    1. सखी ! बहुत दिनों में हुई भेंट ! बहुत दिनों में झंकृत हुए मन की वीणा के तार !
      धन्यवाद. जय जवान. जय वास्तविक किसान.

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  5. श्वास श्वास कृतज्ञ
    शत शत नमन,
    सदा सेवा में सजग
    सज्ज रहें जन गण मन ।
    - गणतंत्र दिवस पर सुंदर रचना। शुभकामनाओं सहित अभिवादन। ।।।

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    1. नमस्ते. धन्यवाद.
      हम सब अपना कद ऊँचा करें.
      पर ना बनें "जैसे पेड़ खजूर".
      जय हिन्द !

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  6. देशप्रेम से सुसज्जित मनोहारी कृति..

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    1. धन्यवाद, जिज्ञासा जी. नमस्ते पर आपका हार्दिक स्वागत है.
      आती रहिएगा.

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  7. Replies
    1. शुक्रिया,माथुर साहब.
      नमस्ते पर आपका हार्दिक स्वागत है.
      उम्मीद है, आना-जाना लगा रहेगा.

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  8. Very nice... bahut hi sundar likha hai apne... :-)

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    1. शुक्रिया,आशीष जी. आपको अच्छा लगा, जान कर हर्ष हुआ.

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  9. बहुत ही सुंदर सृजन।
    सादर

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    1. धन्यवाद, अनीता जी.
      आपका प्रोत्साहन मिलता रहे.
      कारवां आगे बढ़ता रहे.

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