Wednesday, 28 March 2018

हमेशा दिल की बात करना




तुम एक शायर हो ।
तुम्हें पता है ? 
ना जाने 
कितने लोगों का आसरा 
तुम्हारा पता है ।
जिस पते पर 
मन ही मन में, 
इन लोगों ने 
अपने दिल का हाल 
लिख भेजा है ।  
तुम्हारे दिल तक उनका 
पैग़ाम पहुंचा है क्या ?
अगर हाँ  . . 
तो ख़याल रखना इनका । 

हज़ारों की तादाद में,
या अकेले , 
ये तुमसे 
आस लगाये,  
टकटकी बांधे 
बैठे होंगे,
कहीं मंच के सामने । 
तुम हर एक को नहीं पहचानते ।   
बेहद मामूली लोग ये . .  
ठीक से दाद देना भी 
नहीं जानते । 
इनके लिए, 
तुम ग़ज़ल कहना ।  
इनके लिए, 
तुम नज़्म पढ़ना । 

तुम्हारा कहा 
शायद इनके किसी काम आए। 
ये बावले !
तुम्हारी शायरी की 
उंगली थामे, 
एक पूरी ज़िंदगी जी लेंगे !

इसलिए, 
माइक के सामने 
जब तुम बुलाये जाओ,
तुम्हें वास्ता  
अपनी कलम का  . . 
उन तमाम बातों का 
जिन्होंने तुम्हें शायर बनाया  . .  
तुम सिर्फ़ 
उनसे मुख़ातिब होना, 
जो तुम्हारा लिखा  
जीते हैं । 
जिन्होंने शायरी से 
सच्ची मोहब्बत की है । 
जो अपने दिल की बात 
तुमसे सुनने आये हैं । 
तुम अपना कलाम 
उनके लिए पढ़ना ।  
हमेशा दिल की बात कहना । 

20 comments:

sweta sinha said...

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना गुरुवार २९ मार्च २०१८ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

anmol mathur said...

Very few words, multifold meaning. Beautiful, very impactful, as always.

लोकेश नदीश said...

बेहतरीन

Digamber Naswa said...

एक शायर से किये उलाहने ...
बाबस्ता हैं जिसकी कलम से अनेक दीवाने और वो खुद ....
अच्छी रचना ...

noopuram said...

भगवान महावीर और मेरे बहुत - बहुत प्रिय कवि पंडित भवानी प्रसाद मिश्र के दिन पर मुझे भी.. थोड़ी सी जगह आपने दे दी .....सो आपका बहुत आभार ।

पंडितजी की रचना से दिन की शुरुआत तन - मन में हमेशा से ऊर्जा भर देती है ।

सबका दिन अच्छा बीते ।
सबकी कलम कुछ अच्छा लिखे ।

noopuram said...

thank you for your kind appreciation.

I feel happy when I am able to connect with and convey my thoughts to the young readers who have just begun the struggle of life and are learning to relish the journey.

namaste. do keep visiting.

noopuram said...

बहुत शुक्रिया .
आते रहिएगा .

noopuram said...

वाह ! आपने तो जैसे ईदी हथेली पर रख दी, दुआओं के साथ .
क्या कहें !
कोशिश रहेगी बार - बार ऐसा उपहार मिलता रहे . आप पढ़ते रहें .
: )

Nitu Thakur said...

बहुत सुन्दर
बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिए

Sudha Devrani said...

बहुत सुन्दर...
जो अपने दिल की बात
तुमसे सुनने आये हैं ।
तुम अपना कलाम
उनके लिए पढ़ना ।
हमेशा दिल की बात कहना ।
बहुत लाजवाब....
वाह!!!!

Meena Sharma said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति !
तुम्हें पता है ?
ना जाने
कितने लोगों का आसरा
तुम्हारा पता है ।
जिस पते पर
मन ही मन में,
इन लोगों ने
अपने दिल का हाल
लिख भेजा है ।
तुम्हारे दिल तक उनका
पैग़ाम पहुंचा है क्या ?
अगर हाँ . .
तो ख़याल रखना इनका ।
ये पंक्तियाँ मन में उतर गईं ....

noopuram said...

आभार सहित हार्दिक धन्यवाद .
आशा है आपका प्रोत्साहन मिलता रहेगा .
नमस्ते .

noopuram said...

सुधाजी नमस्ते . आप हमेशा इतने सहज भाव से हौसला अफज़ाई करती हैं कि तुरंत और लिखने का मन हो आता है ! आपका स्नेह बना रहे . ये कोशिश रहेगी . : )

noopuram said...

मीनाजी नमस्ते . आपके आगमन की प्रतीक्षा थी .

मेरी अभिव्यक्ति आपकी अनुभूति बन गई .
मेरे मन की बात आप तक पहुँच गई .

सौभाग्य सहर्ष स्वीकार !
मन भर कर आभार !

Deepalee Thakur said...

बहुत सुंदर

noopuram said...

धन्यवाद आभार

Dhruv Singh said...

आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ० २ अप्रैल २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

निमंत्रण

विशेष : 'सोमवार' ० २ अप्रैल २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने सोमवारीय साप्ताहिक अंक में आदरणीय 'विश्वमोहन' जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है।


अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

noopuram said...

हार्दिक आभार ध्रुवजी .

संजय भास्‍कर said...

सुन्दर प्रस्तुति !
आज आपके ब्लॉग पर आकर काफी अच्छा लगा अप्पकी रचनाओ को पढ़कर , और एक अच्छे ब्लॉग फॉलो करने का अवसर मिला !

noopuram said...

जान कर अच्छा लगा कि आपको अच्छा लगा . बस और क्या चाहिए ?
किसी को अच्छा लगे, कुछ अनकही कही जाये ,
इसीलिए तो लिखने वाले लिखते हैं .
आपका हार्दिक स्वागत है .

नमस्ते