Monday, 9 January 2017

कांच

जब जब मन 
कांच की तरह 
चकनाचूर हुआ  . . 
और कई बार हुआ  . . 
एक एक टुकड़ा 
मैंने सहेजा,
और संभाल कर रखा ।
उनमें बार - बार 
अपना अक्स देखा 
और सोचा  . . 

चलो ये भी कोई 
बुरा सौदा तो नहीं !
टूटी चीज़ों को जोड़ कर 
एक बेजोड़ कलाकृति बनाना,
एक नए अस्तित्व  . . 
एक नए व्यक्तित्व को 
जन्म देता है । 
टूट कर बिखरने को भी 
एक अर्थ देता है ।
सुंदरता देता है ।
टूटी आस्था को 
जोड़ देता है  . . 
नाम के लिए ही सही ।

कुछ देर के लिए ही सही 
हौसला तो देता है ,
बिखरे कांच समेटने का,
जोड़ जोड़ कर 
एक नयी इबारत गढ़ने का ।
फिर नए उत्साह से जीने का ।         

       

2 comments:

नमस्ते