विध्वंस का कर्णभेदी कोलाहल
चारों दिशाओं में मचा हाहाकार
अहंकार परस्पर रहा ललकार
ये सृष्टि को कदापि नहीं स्वीकार
कष्ट ही देगा संवेदनहीन व्यापार
सद्भाव का स्वर ही वह पतवार
जो जीवन की नैया लगाएगा पार
जीवट मनुष्य का स्थायी आधार
शुभ संकल्प ही दिखाता रास्ता
साहस का दीप ह्रदय में बालता
मलबे में दब मरा नहीं जो पौधा
एकमात्र श्वेत फूल उस पर खिला
यदि उस शुभ्र पुष्प पर मन अटका
तो बदल जाएगी सोच की धारा
हर नाव ढूँढती है सुरक्षित किनारा
चुनौतियों से डिगता नहीं ध्रुव तारा
गुरुवार, 19 मार्च 2026
एक अकेले फूल की शुभकामना
शनिवार, 7 मार्च 2026
मनपसंद रंग
कोई पूछे अगर
कौनसा है रंग
मेरा मनपसंद ?
कोई न कोई बात
हर रंग की मनभाती !
पचरंग चोला पहन
जगत में रमता जोगी,
घाट-घाट का पानी पी
रंगों से पहचान हुई !
रंग देखे अनगिनत ..
सुबह-शाम के
भोर और गोधूलि के ।
हरे-भरे पात वर्षा में धुले,
ओस की बूँद में धनक,
फूलों में खिले रंग शर्मीले,
आकाशी आभास पारदर्शी
सूर्य रश्मि की उजियारी नदी
और ढलता नारंगी सूरज
बिखेरे रंग हज़ार.. बार-बार !
धूप-छाँव के इंद्रजाल में उलझे
पतंग के मांझे,बचपन के नाते,
कटाक्ष उम्र के ,रंग फीके पङते
या घुलमिल कर नित नये रचते ।
मनपसंद रंग की पहेली बूझिये
हम नहीं चुनते, रंग हमें बुनते हैं ।
बुधवार, 4 मार्च 2026
सदाचार का रंग
वो देखो प्रह्लाद भक्ति में लीन
चारों तरफ़ लगी आग के बीच
निष्ठा का संबल अभय कवच
बाल-बाँका न कर सका ताप
ऐसे हुआ संपन्न होलिका दहन
कुटिलता के अभेद्य अस्त्र-शस्त्र
सरलता के तेज से जाते पिघल
अंततः वरदान भी होता विफल
धूँ-धूँ जलता उद्विग्न जगत सकल
रणभूमि हो अथवा होलिका दहन
अग्नि में निरर्थक हो जाता भस्म
शेष रहता भक्त प्रह्लाद कथा सार