विध्वंस का कर्णभेदी कोलाहल
चारों दिशाओं में मचा हाहाकार
अहंकार परस्पर रहा ललकार
ये सृष्टि को कदापि नहीं स्वीकार
कष्ट ही देगा संवेदनहीन व्यापार
सद्भाव का स्वर ही वह पतवार
जो जीवन की नैया लगाएगा पार
जीवट मनुष्य का स्थायी आधार
शुभ संकल्प ही दिखाता रास्ता
साहस का दीप ह्रदय में बालता
मलबे में दब मरा नहीं जो पौधा
एकमात्र श्वेत फूल उस पर खिला
यदि उस शुभ्र पुष्प पर मन अटका
तो बदल जाएगी सोच की धारा
हर नाव ढूँढती है सुरक्षित किनारा
चुनौतियों से डिगता नहीं ध्रुव तारा
गुरुवार, 19 मार्च 2026
एक अकेले फूल की शुभकामना
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