गुरुवार, 19 मार्च 2026

एक अकेले फूल की शुभकामना


विध्वंस का कर्णभेदी कोलाहल 

चारों दिशाओं में मचा हाहाकार 

अहंकार परस्पर रहा ललकार 

ये सृष्टि को कदापि नहीं स्वीकार 


कष्ट ही देगा संवेदनहीन व्यापार

सद्भाव का स्वर ही वह पतवार

जो जीवन की नैया लगाएगा पार

जीवट मनुष्य का स्थायी आधार 


शुभ संकल्प ही दिखाता रास्ता

साहस का दीप ह्रदय में बालता

मलबे में दब मरा नहीं जो पौधा

एकमात्र श्वेत फूल उस पर खिला 


यदि उस शुभ्र पुष्प पर मन अटका

तो बदल जाएगी सोच की धारा

हर नाव ढूँढती है सुरक्षित किनारा

चुनौतियों से डिगता नहीं ध्रुव तारा



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