थोङी-बहुत सभी
समझते हैं हिन्दी,
भाषा में ढल जाती
कई लहजे अपनाती ।
हर भाषा की अपनी
पहचान है अनोखी ।
पर अलबेली हिन्दी
बनी सब की सहेली ।
बारहखङी वंदनवार सी,
चौवालीस मनकों की
वर्णमाला वनमाला सी,
राजभाषा भारत की ।
संरचना सहज भाषा की
अल्पना ग्यारह स्वरों की
और तैंतीस व्यञ्जनों की
देववाणी संस्कृत से जन्मी ।
कहलाई फिर भी हिन्दी
फारसी द्वारा नामित हुई।
अन्य भाषाओं से जुङी
शब्दावली समृद्ध हुई !
लिपि देवनागरी सिद्ध हुई
वैज्ञानिक कसौटी पे खरी,
जग को शब्दों से जोङती
सबसे सहज जुङी है हिन्दी ।
शुक्रवार, 9 जनवरी 2026
हरफ़नमौला हिन्दी
शुक्रवार, 2 जनवरी 2026
मंदिर के कपाट
नवागन्तुक समय प्रतीक्षारत देहली पार
देहली के भीतर रच-बस गया है अतीत
बीते कल की नब्ज़ थाम करना स्वागत
चुनौतियाँ मिलेंगी करते ही चौखट पार
खुलते ही द्वार होता संभावना का जन्म
हवा-पानी,गंध,धूप और धूल का पदार्पण
ठोक-पीट सिखाता जीवन का शिष्टाचार
अनुभव और अनुभूति के सहज नेगाचार
मन की वीथियों के छूटें जब द्वंद और फंद
तब खुलते हैं स्वत: सानंद मंदिर के कपाट
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कोलम कलाकार : श्री करन पति
गुरुवार, 1 जनवरी 2026
समय के साथ चल
समय लेता है करवट हर बरस
जैसे मुट्ठी से रेत जाए फिसल
हर बीता पल समय का स्पंदन
लहर-लहर बहता नदी का जल
घूम-फिर कर फिर लौटेगा कल
क्षितिज तक नाव अपनी ले चल
आगे न पीछे समय के साथ चल
अपने बल पर मुकाम हासिल कर
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