शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

मंदिर के कपाट

 

 

नवागन्तुक समय प्रतीक्षारत देहली पार  

देहली के भीतर रच-बस गया है अतीत


बीते कल की नब्ज़ थाम करना स्वागत

चुनौतियाँ मिलेंगी करते ही चौखट पार


खुलते ही द्वार होता संभावना का जन्म 

हवा-पानी,गंध,धूप और धूल का पदार्पण 


ठोक-पीट सिखाता जीवन का शिष्टाचार 

अनुभव और अनुभूति के सहज नेगाचार


मन की वीथियों के छूटें जब द्वंद और फंद 

तब खुलते हैं स्वत: सानंद मंदिर के कपाट

 

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                    कोलम कलाकार : श्री करन पति

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