रविवार, 11 जुलाई 2021

कहानी


कहानी कहानी होती है ।
कितनी भी सच्ची लगे !
जितनी भी दिल को छुए ।
कहानी कहानी होती है ।
कहानियों से क्या होता है ?

कहानियों से क्या होता है ?
हाँ , कुछ याद रह जाती हैं ।
दिल में जगह बना लेती हैं ।
नेक इरादे तराश देती हैं ।
पर सच कहाँ हो पाती हैं ?
कहानी कहानी होती है ।

ईश्वर करे ! खांटी कहानी ये
सच्ची दास्ताँ ही बन जाए ।
हर सरल स्त्री के जीवन में, 
हर उस आदमी के हिस्से में 
जो कमज़ोर माना जाता है,
थोड़ा-सा हौसला आ जाए,
तो कहानी ही बदल जाए ।


चित्र साभार : श्री रौनक़ चौहान 


मंगलवार, 15 जून 2021

प्रतिबिंब



फूल की पंखुरी
या पत्ते पर ठिठकी
पानी की इक बूँद, 
क्षणभंगुर जीवन के
अप्रतिम सौंदर्य की 
प्रामाणिक छवि है ।

ये भी हो सकता है 
यह पारदर्शी बूँद 
चुपके से ढुलका
नमकीन आंसू है,
जप माला का 
टूटा मनका है या
आस का मोती है ।

संभवतः कोई कहे
श्वास भर यह बूँद 
संवेदनशील ह्रदय का
निश्छल भाव है,
प्रकृति का हास है,
जिसे सूर्य रश्मि 
स्पर्श कर ले यदि
सतरंगीं इंद्रधनुष की 
रूपहली कोर है ।

जिसकी जैसी 
है मनःस्थिति, 
यह बूँद उसी
अनुभूति का
प्रतिबिंब है ।
 

मंगलवार, 25 मई 2021

करावलंबन

कच्ची उम्र के बच्चे
अनुभव के कच्चे
छोटे-छोटे हादसे
क्यों सह नहीं पाते ?

क्यों उनके भीतर
जवान होता बच्चा
इतना सहम गया
कि आत्मघात करना पड़ा ??

उम्मीद बर ना आये
तो जान पर बन आये ?
ऐसा क्या खो बैठे ?
जिसकी भरपाई ना हो पाए ?

उनके भीतर कहीं
गहरी खाई थी क्या ?
जो पाँव फिसले
तो संभल भी ना पाए ?

क्या अपने चूक गए
इनके भीतर उठे
भूचाल के झटके
वक़्त रहते समझने में ?

माँ-बाप ने ला-ला के
खिलौने जैसे सपने दिए
पर क्या वो देना भूल गए
सुरक्षा कवच संस्कारों के ?

फिर किसी बच्चे ने अपने
प्राण तिरोहित कर दिए
यार-दोस्त देखते रह गए
माँ-बाप स्तब्ध रह गए

दुनिया ने सिखाया कैसे
सब कुछ हासिल करना
पर किसी ने ना सिखाया
ना मिले तो आगे बढ़ें कैसे ?

खाई में गिर के वो बचेगा कैसे ?
गोविंद आपने थामा था जैसे
भक्त प्रह्लाद को अपने हाथों में
अपना लेना उसे भी अंक में भर के ।