नानाजी ने दी थी
नारायण की चवन्नी ।
कहा था,
संभाल कर रखना
इसे कभी मत खोना ।
ये भी कहा था,
जब सब खो जाता है,
तब काम आती है
नारायण की चवन्नी ।
बात सच्ची निकली ।
जब किस्मत खोटी निकली
तब चवन्नी ही काम आई ..
नारायण की चवन्नी ।
क्या नहीं खरीद सकती ?
चांदी-सोने की गिन्नी ?
पर मन का चैन देती
नारायण की चवन्नी ।
इस चवन्नी के बल पर
हम दुनिया से लड़ गए ।
बहुत हारे, पर हारे नहीं ।
हमारी मुट्ठी में जो थी,
नारायण की चवन्नी ।
अमीरी का हमारी
ठिकाना नहीं !
ठाकुरजी के दिए
ठाठ हैं सभी !
प्रारब्ध की कील
गड़ती नहीं ।
विरासत में हमको
सेवा मिली ।
रसास्वादन की
कला दी थी ..
रस में पगी
कथा दी थी ..
नानाजी ने दी थी
नारायण की चवन्नी ।



