बुधवार, 17 जुलाई 2019

नारायण की चवन्नी


जीवन को उत्सव जानो ।
कर्मठता में ढालो ।
परम उत्साह से सींचो ।
हर अनुभव से कुछ सीखो ।

विद्या का सार समझो ।
अवसर पर न चूको ।
परिश्रम करते रहो ।
हरि नाम जपते रहो ।

समस्याओं का सामना करो ।
विडंबनाओं से लोहा लो ।
गुरुदेव ने कहा,
और उतार दी नौका
भव सागर में ।

इससे पहले उन्होंने
सिर पर हाथ रखा
और हाथ में रख दी
सबसे बड़ी पूँजी
नारायण की चवन्नी ।

नारायण नारायण नारायण कहना
और केशव का ध्यान करना ।
सदा हँसते रहना
और निज कर्तव्य करते रहना ।

जीवन की हर कसौटी
पर उतरेगी खरी
यह संजीवनी बूटी,
तुम्हारी सबसे बड़ी पूँजी
नारायण की चवन्नी ।

शुक्रवार, 12 जुलाई 2019

आषाढ़ी एकादशी का नमन




तीन गुलाब 
खिले एक साथ !
छोटे से पौधे पर !
पात-पात पर आई बहार !
चतुर्दिक छाई रौनक़ !

वर्षा हो रही थम-थम  .. 
बूंदों का जलतरंग कर्णप्रिय 
सुन कर गदगद मन मयूर 
फैला कर इंद्रधनुषी पंख 
बाँध कर बूंदों के नूपुर  
नृत्य कर रहा झूम-झूम !

मन मगन बना विशाल गगन 
तब प्रस्तुत हुआ यह प्रश्न  .. 
मुरझा जाएं ये सुमन  .. 
उससे पहले ही इनको चुन 
कैसे करूँ इनका अभिनन्दन ?
क्योंकि इनकी छटा है अनमोल !

तभी सुना वारकरी का मधुर गान
पांडुरंग हरि विट्ठल ! विट्ठल विट्ठल !
रोली से लाल स्निग्ध तीन गुलाब
किये ठाकुर सेवा में सहर्ष अर्पित 
मन का दीप बाल किया हरि का वंदन।