Wednesday, 10 July 2019

बेधड़क


6 comments:

  1. Hi Noopur. Your poems are awesome. This one literally took me back to my grandparents village where I was born. Those muddy streets, coconut groves came in as a flashback. Enjoyed the poem. Keep entertaining us more with such lovely poems.

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    1. My heartfelt thanks to you. I wish I knew your name.
      I believe everyone should spend a part of their lives in the villages amidst nature and simplicity.

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (12-07-2019) को "भँवरों को मकरन्द" (चर्चा अंक- 3394) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. धन्यवाद शास्त्रीजी - हमेशा प्रोत्साहित करने के लिए. नमस्ते.

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  3. वाह!!बेहतरीन प्रस्तुति !

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    1. शुक्रिया. नमस्ते पर आपका स्वागत है.आते रहिएगा.

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कुछ अपने मन की कहते चलिए

नमस्ते