भई ये लोकतंत्र है ..
वो भी संसार का सबसे बड़ा !
कोई क्या कह सकता है किसी को !
पर भाइयों और बहनों कभी तो सोचो !
हम इस लोकतंत्र में रहने लायक हैं क्या ?
लोकतंत्र में रहने के कर्तव्य हमें क्या होंगे पता !
संविधान में दिए अधिकार भी मालूम हैं क्या ?
फिर किसको देते हो किसका वास्ता ?
कैसा वास्ता ? मेरे भाई कैसा वास्ता ?
बंद करो ऊँची आवाज़ में चिल्लाना !
कुछ नहीं तो नागरिकता का ही पाठ पढ़ो !
खुद समझो और समझने में मदद करो !
केवल नारों से मत कृतार्थ करो जन मानस को !
अपने सिद्धांतों को खंगाल अब अमल करो !
नीचे उतरो मंच से, आसन छोड़ो और श्रम करो !
नेता को अपशब्द कह छाती मत ठोंको !
नेता हम जैसा है ! हमारे बीच से ही आता है ।
वह देश भक्त ना रहे तो अपदस्थ करो !
पर बाहर तो निकलो बिल से और वोट करो !
अफ़सर और नेता को समझाने से पहले
ख़ुद तो पहले ज़िम्मेदारी अपनी समझो !
जम कर आलोचना करो यदि उचित हो !
पर काम करो खुद भी और सबको करने दो !
वो भी संसार का सबसे बड़ा !
कोई क्या कह सकता है किसी को !
पर भाइयों और बहनों कभी तो सोचो !
हम इस लोकतंत्र में रहने लायक हैं क्या ?
लोकतंत्र में रहने के कर्तव्य हमें क्या होंगे पता !
संविधान में दिए अधिकार भी मालूम हैं क्या ?
फिर किसको देते हो किसका वास्ता ?
कैसा वास्ता ? मेरे भाई कैसा वास्ता ?
बंद करो ऊँची आवाज़ में चिल्लाना !
कुछ नहीं तो नागरिकता का ही पाठ पढ़ो !
खुद समझो और समझने में मदद करो !
केवल नारों से मत कृतार्थ करो जन मानस को !
अपने सिद्धांतों को खंगाल अब अमल करो !
नीचे उतरो मंच से, आसन छोड़ो और श्रम करो !
नेता को अपशब्द कह छाती मत ठोंको !
नेता हम जैसा है ! हमारे बीच से ही आता है ।
वह देश भक्त ना रहे तो अपदस्थ करो !
पर बाहर तो निकलो बिल से और वोट करो !
अफ़सर और नेता को समझाने से पहले
ख़ुद तो पहले ज़िम्मेदारी अपनी समझो !
जम कर आलोचना करो यदि उचित हो !
पर काम करो खुद भी और सबको करने दो !


