सही में यार !
बहुत मुश्किल है !
सही क्या ?
ग़लत क्या ?
इस सब की विवेचना ।
बहुत मुश्किल है !
सही क्या ?
ग़लत क्या ?
इस सब की विवेचना ।
कोई कितना करे ?
और कब तक करे ?
और कब तक करे ?
किंतु परंतु का कोई
अंतिम छोर है क्या ?
निष्कर्ष कैसे निकलेगा ?
अंतिम छोर है क्या ?
निष्कर्ष कैसे निकलेगा ?
रेगिस्तान में जल दिखना
तो छलना है ।
मृगतृष्णा है ।
क्षितिज जब तक
दूर है,
सबको मंज़ूर है ।
नज़र का नूर है ।
मगर पास गए अगर
तो कुछ भी नहीं है ।
भुलावा है ।
मनमोहक है पर
मात्र दृष्टिकोण है ।
दूर है,
सबको मंज़ूर है ।
नज़र का नूर है ।
मगर पास गए अगर
तो कुछ भी नहीं है ।
भुलावा है ।
मनमोहक है पर
मात्र दृष्टिकोण है ।
अब बताइए ।
क्या किया जाए ?
सही को कहाँ ढूंढा जाए ?
क्या किया जाए ?
सही को कहाँ ढूंढा जाए ?
सही तो भई
परिस्थितियों की बही पर
समय के दस्तख़त हैं ।
समय के साथ
लिखा-पढ़ी करने पर
बदल भी सकते हैं ।
फिर एक दिन ऐसे ही
बैठे-बैठे अनायास ही
सब समझ में आ गया ।
बैठे-बैठे अनायास ही
सब समझ में आ गया ।
असल में काम सही है वही
जिसका मंसूबा नेक हो ।
जिसका मंसूबा नेक हो ।



