मंगलवार, 12 मार्च 2019

पार उतराई




कोई दुख
होता है ऐसा
जो कभी भी
कहते नहीं बनता। 

कविता में नहीं,
कथा में नहीं,
बंदिश में नहीं,
रंगों में नहीं,
बस चुपचाप
बहता रहता है
भीतर कहीं,
चौड़े पाट की
नदी की तरह ।

तट कभी भी
मिलते नहीं ।
पर उम्मीद भी
कभी टूटी नहीं ।
अब भी 
लहरों में ढूंढती
नाव केवट की,
जो पार उतारती
प्रभु राम को भी,
लिए बिना ही
पार उतराई ।


शुक्रवार, 8 मार्च 2019

अब हमारी बारी



अभिमन्यु की वीरगति 
कभी भी व्यर्थ नहीं जाती। 
बलिदान की परिणति 
न्याय की स्थापना ही होती। 

यही इस देश की नीति .. 

समस्त विश्व से प्रीति 
पर युद्ध में चाणक्य नीति। 
विजय सदैव मानवता की 
क्यूंकि लक्ष्य केवल शांति ही। 

जवानों ने खूब निभाई ज़िम्मेदारी 

अब आई हर भारत वासी की बारी। 

इसलिए आज का प्रण हो यही 

हम भूलें ना वीरों का बलिदान कभी। 
स्वाभिमान को भारत के ठेस ना लगे कभी 
ध्वज हमारा शान से लहराए यूँ ही।  




गुरुवार, 7 मार्च 2019

मुझे क्या करना है ?




सीमा पर फ़ौजी तो
हमेशा ही तैनात रहा।
क्या हमें भी अपने
कर्तव्य का भान रहा ?

युद्ध
हर जगह चल रहा है। 
युद्ध
हर कोई लड़ रहा है। 

कोई सीमा का प्रहरी है। 
कोई घर में युद्ध बंदी है। 

युद्ध की कोई
सीमा है क्या ?
युद्ध की कोई
गरिमा है क्या ?

भीतर हम सबके 
एक लक्ष्मण रेखा है। 
अपने सिवा इसे
किसी ने नहीं देखा है। 
लेकिन हम सबको पता है.
रावण क्यों बुरा है। 

सीमा पर जब जवान
जान हथेली पर लिए
लड़ रहा है  .. 
जवान का परिवार
अपनी भावनाओं से
जूझ रहा है  .. 
देश के 
हर नागरिक की भूमिका,
कृतज्ञ हो कर, 
धैर्य धर यह सोचना  .. 
मुझे क्या करना है ?

मुझे क्या करना है ?
कैसे सेना के त्याग का
अभिनन्दन करना है ?

हमको अपने-अपने बल पर,
अपने-अपने मोर्चे पर 
रोज़ एक युद्ध लड़ना है। 
रोज़ एक युद्ध जीतना है। 
अंदरूनी ताक़त से 
ज़िम्मेदार भारत 
बने रहना है।  
दृढ़ संकल्प और मेहनत से,
खुशहाल भारत गढ़ना है.