बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

जोश



जब तक होश है। 
रग-रग में जोश है। 

जिगर में 
जोश के बुलबुले नहीं ,
जोश के जुगनू भी नहीं 
जो पलक झपकने तक ही 
मौजूद रहें। 

ये जो 
कौंधता है 
मेरे वजूद में ,
बिजली की तरह  . . 

ये बरसों की तपस्या है। 
ठोकर खा-खा कर जो संभला है,
आग में तप कर जो निखरा है,
वो फ़ौलादी हौसला है। 

ये वीरता का अखंड दिया है। 
जो अलख जगाने वाला है।    
तिरंगे की सौगंध है। 
माँ से बच्चों का वादा है। 

दुष्टता का शत्रु है। 
मानवता का मित्र है। 

जब तक होश है। 
रग रग में जोश है।       



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सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

सावधान




वक़्त पर मत चूकना
इतना तैयार रहना ।

करना निरंतर अभ्यास
दिन-रात लक्ष्य साधना ।

समय पर देती है साथ
केवल अपनी साधना ।

कर्म पर करना विश्वास
सत्कर्म से स्वधर्म साधना ।

वक़्त पर मत चूकना ।
इतना तैयार रहना ।


सोमवार, 11 फ़रवरी 2019

वसंत



आई वसंत ऋतु की बहार

पहन पीली सरसों के फूल


लय में बह रही शीतल बयार

धीरे धीरे बहे नदिया की धार


कोयलिया करे मीठी मनुहार

क्यारी में झूमे फूलों की कतार


उल्लास ही सबसे सुंदर श्रृंगार

मौसम में मानो घुल गया प्यार