कोई पूछे अगर
कौनसा है रंग
मेरा मनपसंद ?
कोई न कोई बात
हर रंग की मनभाती !
पचरंग चोला पहन
जगत में रमता जोगी,
घाट-घाट का पानी पी
रंगों से पहचान हुई !
रंग देखे अनगिनत ..
सुबह-शाम के
भोर और गोधूलि के ।
हरे-भरे पात वर्षा में धुले,
ओस की बूँद में धनक,
फूलों में खिले रंग शर्मीले,
आकाशी आभास पारदर्शी
सूर्य रश्मि की उजियारी नदी
और ढलता नारंगी सूरज
बिखेरे रंग हज़ार.. बार-बार !
धूप-छाँव के इंद्रजाल में उलझे
पतंग के मांझे,बचपन के नाते,
कटाक्ष उम्र के ,रंग फीके पङते
या घुलमिल कर नित नये रचते ।
मनपसंद रंग की पहेली बूझिये
हम नहीं चुनते, रंग हमें बुनते हैं ।
शनिवार, 7 मार्च 2026
मनपसंद रंग
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आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 09 मार्च, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंआपकी कविता पढ़कर मुझे सच में रंगों की पूरी दुनिया याद आ गई। आपने बहुत सरल शब्दों में जीवन के अलग-अलग रंग दिखाए। भोर, गोधूलि, बारिश और ढलते सूरज का जिक्र पढ़कर मन में सुंदर चित्र बनता है। मुझे “हम नहीं चुनते, रंग हमें बुनते हैं” वाली पंक्ति बहुत गहरी लगी।
जवाब देंहटाएंरंगों के बिना कितनी सूनी होती यह दुनिया, प्रकृति के अनमोल रंग लुभाते हैं और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं, सुंदर रचना!!
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