यमुना के इसी पाट पर
कालिन्दी के इसी घाट पर
कन्हैया ने की थी लीला,
यहीं शीश नवाते हैं हम
लीला स्मरण कर अब तक ।
यमुना की लहरों पर लिखा
अब भी साकार लीला सार ।
कालिया नाग को नाथा था
और विष मुक्त किया था
यमुना जल नटवर नागर ने ।
मुग्ध होकर हमने सुना वर्णन
पर स्वयं क्यों न देख सके दर्पण ?
जिस यमुना की स्तुति की हमने
बङे चाव से की चढाई चुनरिया,
उसी यमुना मैया को किया मैला !
नदी को बना दिया एक नाला ?
आरती की 'उज्ज्वल तट रेणु की' ?
पथरा गया मार्ग परिक्रमा का ।
चिन गया तट श्री यमुना का ।
मिट गया प्राचीन वृक्षों का पता ।
'बज रही मुरली मधुर वेणु' कहाँ ?
हर तरफ़ भीङ, धक्का-मुक्का,
खोमचे,दुकानें,लाउडस्पीकर घनघोर !
किसने मोर मुकुट वाले को पुकारा ?
क्या हमने यमुना मैया से ही पूछा ?
'कालिन्दी कूल' क्या अब भी आता
रास रचाने, गाय चराने नंदलाला ?
जिस दिन हम चेतेंगे समझेंगे पीङा,
सर्वप्रथम साफ़ करेंगे यमुना मैया ।
नौका लीला करने फिर से आएगा,
मुरली बजैया,रास रचैया कन्हैया ।
चरण पखारेगी जिनके यमुना मैया ।
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