रविवार, 2 अक्तूबर 2022

आचरण में अनुसरण


बापू से और शास्त्री जी से
हमने पूछे अनगिनत सवाल ।
मंडवा कर चित्र आदमकद
सादर दिया खूंटी पर टांग ।
प्रतिमा भव्य गढ़वा कर
सङक किनारे कर अनावरण
बाकायदा किया दरकिनार ।
निबंध लिखो बढ़िया-सा बच्चों !
नंबर पाओ शानदार !
दिवस मनाओ ज़ोर-शोर से !
करो बङी-सी सेमिनार !
और भूल जाओ उसके बाद ।
महापुरुषों की विचारधारा 
ग़लती से भी बरखुरदार ! 
दिल पर मत ले लेना !
हो जाएगा सत्यानाश !
आदर्श मानवों को देखो
ताक पे रखा जाता है !
उनके जीवन से सीख कर
कौन जीवन जीता है !
ठोक-ठोक कर समझाया !
विसंगतियों का भय दिखाया !
पर मान गए बापू तुमको !
और शास्त्री जी के क़द को !
मुट्ठी भर ही होंगे ऐसे
एकनिष्ठ एकलव्य सरीखे 
जो चले तुम्हारे रास्ते ,
और अपने स्वाध्याय के 
बीज राह में बोते चले ।
ये मौन धरे कर्मठ योगी
भारत माँ के चरणों में 
अर्पित कर अपनी मेधा
अखंड यज्ञ करते रहे ।
ये करते नहीं नुक्ताचीनी ।
जो सीख सके जो समझ सके
अपने जीवन में पिरोते रहे ।
 
 
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चित्र अंतरजाल के सौजन्य से 

15 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार(०३-१० -२०२२ ) को 'तुम ही मेरी हँसी हो'(चर्चा-अंक-४५७१) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. बहुत प्यारे शीर्षक वाली चर्चा में सम्मिलित करने के लिए आपका हार्दिक आभार, अनीता जी ।

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  2. बापू और शास्त्री जी को बहुत सुन्दर श्रद्धांजलि !

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    1. सविनय धन्यवाद । इन दोनों का वरदहस्त हर भारत वासी पर रहता है ।

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  3. सही कहा है। बस नाम भर ही महानता रह गई है आज। अनुसरण कौन करता है।

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  4. धन्यवाद, अमृता जी । अनुसरण करें न करें, जी तो कचोटता होगा, जब ग़लत कदम उठता है ।

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  5. बहुत सुंदर और सटीक रचना ।

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