Friday, 31 December 2021

समय का अल्पविराम


हो रहा है इस बरस का
अंतिम सूर्यास्त ।
कह रहा है अलविदा 
ढलते हुए आज । 

वक्त रहते कह डालो
जी में अटकी बात ।
समय बीतने से पहले 
सुलझा लो उलझे याम ।

सांझ का पट ढल रहा
सजा रंगों के साज़ ।
क्षितिज सुर साधता
जपता सहस्रनाम ।

यायावर है फिर चल देगा
समय का अल्पविराम ।
कभी तुम्हारे कभी हमारे 
राम संवारें सबके काम ।





10 comments:

  1. श्री राम संवारे सबके काज। वाह। क्या कविता रची है। नया साल मुबारक

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    1. २०२२ उन्नीस ना रहे, २०२१ से.

      स्नेह सहित आभार, अनमोल सा.

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  2. सुंदर भावों और प्रेरक शब्दों की अभिव्यंजना 👌👌

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    1. धन्यवाद,जिज्ञासाजी.
      आपने पढ़ा और सराहा.बहुत अच्छा लगा.
      कई बार बात अपनी जगह रह जाती है.
      सबकी निगाहों से छूट जाती है.

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  3. बेहद सुंदर कृति

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    1. सविनय धन्यवाद,भारती जी.

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  4. बहुत सुंदर

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    1. धन्यवाद, ओंकारजी.
      २०२२ अच्छा बीते.

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