Monday, 31 August 2020

ना छोड़ेंगे अकेला

होने चाहिए
हर आदमी की
ज़िंदगी में
मुट्ठी भर ऐसे लोग
जो आपकी चुप्पी का
बहुत बुरा मानें ।
अपनी नाराज़गी से
आपको खंगालें,
मजबूर कर दें,
अपनी चुप्पी
उंडेल देने को ।
ये जताने को कि 
फ़र्क पड़ता है उन्हें
हमारे होने या
ना होने से ।
आश्वस्त करने के लिए
कि वो हमेशा रहेंगे
मौजूद कहीं आसपास
आपको तंग करने के लिए ।
जीना हराम कर देंगे ।
पर अकेला नहीं छोड़ेंगे ।

17 comments:

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    1. शुक्रिया, जोशी जी ।
      नमस्ते ।

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  2. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (01 -9 -2020 ) को "शासन को चलाती है सुरा" (चर्चा अंक 3810) पर भी होगी,आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

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    1. हार्दिक आभार, कामिनी जी ।
      चर्चा के सुर संभवतः सुरा को परे हटा दें !

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  3. My best friend told me once, a friendship can be considered strong, when silence is comfortable. When you no longer need words to understand each other. Also, when you can break your friend's gloomy scilence. You put it beautifully in this kavita 😊

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  4. Thank you Sa. At some point in life, a realization dawns upon you that someone who understands your unspoken thoughts in silence,also senses when your silence becomes a screen that hides and it's time to play the role of a pestering, irksome,interfering person you can't get rid of.

    And believe me, you are grateful for that someone in your life, who will just not let go !

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  5. बहुत खूब ल‍िखा... हमने यूं भी ज‍िन्हें अकेला छोड़ा उनका हश्र समाज की कई कम‍ियों को उजागर कर गया.. इसल‍िए ''फ़र्क पड़ता है उन्हें
    हमारे होने या
    ना होने से ।'' फर्क पड़ना ही तो जीवंतता है

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    1. धन्यवाद, अलकनंदा जी. सही कहा आपने. सारा दारोमदार इसी बात पर है कि आपको फ़र्क पड़ता है कि नहीं. फ़र्क पड़ता तो कितनी जानें बच जाती, कितनी जिंदगियां संवर जाती. धरती साँस ले पाती.

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  6. Replies
    1. Thank you for granting the permission to pester you endlessly !
      ; )

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  7. बेहद खूबसूरत रचना।

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    1. आपको अच्छी लगी, जान कर खुशी हुई । शुक्रिया ।

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  8. बहुत सुन्दर

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