शनिवार, 2 मई 2020

कविता क्या खाक !


वाह भई वाह !
क्या खूब !
क्या कहने !
छा गए !

बहुत कामयाब रहा !
कवि सम्मेलन तुम्हारा !
लोगों ने बहुत सराहा !
खूब तालियां बजी !
चहुं दिक चर्चा हुई !

पर एक बात बताओ भई !
कब से माथे को मथ रही !

तुमने बात बड़ी अच्छी कही !
पर आचरण में दिखी नहीं !

कविता अगर जी नहीं
तो क्या खाक लिखी !


18 टिप्‍पणियां:

  1. वाह !! बहुत खूब !! बहुत सुन्दर सृजन नुपुरं जी ।

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  2. कविताओं को जीना होता है ... पर हर कल्पना को जीना आसान नहीं होता ...

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    1. जी. आपने सही कहा.
      अपितु यहाँ कविता से अभिप्राय था..मर्म.
      कल्पना की बात और है.

      : ) अपनी बात कहने के लिए आपका असीम आभार.

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    1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. वाह!!!
    कविता जी नहीं तो क्या खाक लिखी...
    बहुत लाजवाब सृजन।

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    1. अनंत आभार सुधा जी ।
      अनायास यह बात सूझी !
      किसी ने पढ़ी या नहीं,
      कहीं छपी या नहीं ..
      किंतु प्रश्न आखिर है यही,
      कविता जो लिखी
      वह गुनी या नहीं !
      : )

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  5. उत्तर
    1. बात पर अमल भी हो तो बात बने !
      अपनी ये नीयत बनी रहे दुआ कीजिए !

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  6. सच भी हो, कोशिश यही है !
    शुक्रिया अनाम पाठक !

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