Wednesday, 25 March 2020

नव संवत्सर अभिवादन


अब समय आ गया है
पुराने बहीखाते बंद कर
नई जिल्द बंधवाने का ..
पुरानी सिलाई उधेड़ कर
नए धागों से भविष्य बुनने का ।
द्वार पर खड़ा है नव संवत्सर
अभिवादन करें इस बार हम
सविनय देहली पूजन कर ।

सब कुछ ठहर गया है ।
समय चकित खड़ा है ।
अब समय आ गया है,
सारे नियम बदलने का ।
विस्मृत पाठ दोहराने का ।

अब समय आ गया है
सजग सचेत सतर्क होने का ।
स्वयं से प्रश्न पूछने का,
क्या हमें यही चाहिए था
जो विनाश अब मिला है ?
या लक्ष्य भेद हो न सका ?
ध्येय से ध्यान भटक गया ।

अब समय आ गया है
आदतों को बदलने का ।
व्यवधान दूर करने का,
समाधान ढूढने का ।
मनमानी करना काम ना आया ।
प्रकृति ने यह सबक सिखाया,
सीखो मानव आदर करना,
प्रकृति और जीवन चक्र का ।
समय रहते जो मानव समझ गया,
मंगल आगमन होगा नव संवत्सर का ।

10 comments:

  1. सुन्दर सृजन।
    नव संवत्सर की बधाई हो।।
    --
    घर मे ही रहिए, स्वस्थ रहें।
    कोरोना से बचें

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    1. धन्यवाद शास्त्रीजी ।
      नव संवत्सर आपके लिए भी शुभ हो ।
      बहुत कुछ बदलेगा इस साल ।

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  2. " अब समय आ गया है
    सजग सचेत सतर्क होने का ।
    स्वयं से प्रश्न पूछने का,
    क्या हमें यही चाहिए था
    जो विनाश अब मिला है ?
    या लक्ष्य भेद हो न सका ?
    ध्येय से ध्यान भटक गया ।"
    वाह!उम्दा

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    1. आँचल जी, नमस्ते पर आपका हार्दिक स्वागत है.
      सहृदय सराहना के लिए धन्यवाद.

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  3. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (27-03-2020) को नियमों को निभाओगे कब ( चर्चाअंक - 3653) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    आँचल पाण्डेय

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  4. धन्यवाद, आँचल जी.
    नव संवत्सर शुभ हो .

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  5. अब समय आ गया है
    आदतों को बदलने का ।
    व्यवधान दूर करने का,
    समाधान ढूढने का ।
    बहुत सुंदर सृजन ,सादर नमन

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    1. धन्यवाद कामिनीजी.
      अचानक बहुत कुछ बदल गया है.

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  6. सुन्दर रचना

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    1. धन्यवाद, ओंकारजी. पढ़ते रहियेगा.

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नमस्ते