Thursday, 7 February 2019

जीवन का जाप


पथिक, 
चलते रहना 
तुम्हारी नियति है.

पर यदा-कदा 
विश्राम करना.
चना-चबैना 
जो अपनों ने 
साथ बांधा था,
उस पाथेय से भी
न्याय करना. 

छाँव घनी हो 
जिस वृक्ष की 
उसकी छाया में 
कुछ देर बैठना.

अपने पाँव के छाले 
देखना और सहलाना.
शीतल बयार की 
थपकी पाकर 
चैन की नींद 
सो जाना.

गहरी नींद में भी 
जीवन के कई 
प्रश्नों के उत्तर 
और समाधान 
मिल जाते हैं.

कुछ पल का सुकून 
बल देता है अपार,
पथ पर चलते रहने का
करते हुए जीवन का जाप.




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14 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (09-02-2019) को "प्रेम का सचमुच हुआ अभाव" (चर्चा अंक-3242) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. आभार शास्त्रीजी.

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  2. जीवन की एक आओर सच्चाई है ये

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    1. आपका नेह पाकर प्रसन्नता हुई, सुनीता जी.

      सच सबसे बड़ा संबल है जीवन का.

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    2. This comment has been removed by the author.

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  3. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन 51वीं पुण्यतिथि - पंडित दीनदयाल उपाध्याय और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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    1. परम सौभाग्य.
      धन्यवाद हर्षवर्धन जी.

      पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम जिस पृष्ठ पर हो, उस के हाशिये पर जगह पाकर हमारा मां बढ़ा है.

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  4. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 13 फरवरी 2019 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. हार्दिक आभार.
      पम्मी जी, ये पड़ाव मनमोहक था.
      अगले पड़ाव की प्रतीक्षा है.

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  5. अनुराधा जी,धन्यवाद. आपका स्नेह अनमोल है.

    हम सबका अनचीन्हा दायित्व है
    अपना जीवन बेहतरीन रचना

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  6. This comment has been removed by the author.

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  7. बहुत सुंदर जीवन.दर्शन.. वाह्ह्ह👌

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  8. धन्यवाद श्वेता जी.

    चलते-चलते पुण्य पथ प्रशस्त हो जाता है.
    गुनते-गुनते जीवन दर्शन मिल जाता है.

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