Monday, 21 January 2019

इस दिन का नेग




सूरज सुबह सुबह
चढ़ कर
जा बैठा है
आकाश की मुंडेर पर ।

रात की ओस से
भीजे बादल
डाल दिए हैं
अलगनी पर
एक तरफ़
सूखने के लिए ।

पंछी निकले हैं
प्रभात फेरी के लिए ।

किरणों की वंदनवार
झिलमिला रही है,
धरती के इस छोर से
उस छोर तक ।

हर रोज़ की तरह
ज़िंदगी ने
खोल दी है
अपनी दुकान ।

मेहनत करो
और जीतो
सुकून का ईनाम ।

एक नया दिन
सीना ताने
तैयार है,
ड्यूटी पर
जाने के लिए ।

और तुम्हें साथ
ले जाने के लिए ।

क्योंकि सूरज
बुला रहा है तुम्हें
कब से ।

चलो चलें ।
इस दिन का नेग
जुटाने के लिए ।


            """"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""

पहली बार ऐसा हुआ। 
एक युवा पाठक ने 
इतने मन से 
पढ़ी यह बात। 
ऊपर जुड़ी water colour पेंटिंग बना डाली। 
देखिए क्या खूब मिला !
सबसे निराला !
इस दिन का नेग !!
Anmol Mathur नन्हे पाठक का 
तहे-दिल से शुक्रिया !


9 comments:

  1. आज सलिल वर्मा जी ले कर आयें हैं ब्लॉग बुलेटिन की २३०० वीं बुलेटिन ... तो पढ़ना न भूलें ...


    छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़िर लगी हुई - 2300 वीं ब्लॉग बुलेटिन " , में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. धन्यवाद ब्लॉग बुलेटिन और सलिल वर्माजी.
      बिल्कुल नहीं छूटती ! कविता चीज़ ही ऐसी है !

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  2. जब जागो, तभी सवेरा !
    सुन्दर, ऊर्जावान और उत्साहवर्धक कविता और बाल-कलाकार की उस पर कलात्मक प्रतिक्रिया!

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    1. आपकी सहृदय सराहना के लिए हार्दिक आभार.
      सही कहा आपने - जब जागो तब ही सवेरा.
      रोज़ ख़ुद को याद दिलाना पड़ता है.
      कभी आप ही याद आ जाता है.

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (23-01-2019) को "अब G+ खत्म होने वाला है" (चर्चा अंक-3225) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. पुनः हार्दिक आभार शास्त्रीजी. नमस्ते..

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  5. आवश्यक सूचना :
    अक्षय गौरव त्रैमासिक ई-पत्रिका के प्रथम आगामी अंक ( जनवरी-मार्च 2019 ) हेतु हम सभी रचनाकारों से हिंदी साहित्य की सभी विधाओं में रचनाएँ आमंत्रित करते हैं। 15 फरवरी 2019 तक रचनाएँ हमें प्रेषित की जा सकती हैं। रचनाएँ नीचे दिए गये ई-मेल पर प्रेषित करें- editor.akshayagaurav@gmail.com
    अधिक जानकारी हेतु नीचे दिए गए लिंक पर जाएं !
    https://www.akshayagaurav.com/p/e-patrika-january-march-2019.html

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  6. आवश्यक सूचना :
    अक्षय गौरव त्रैमासिक ई-पत्रिका के प्रथम आगामी अंक ( जनवरी-मार्च 2019 ) हेतु हम सभी रचनाकारों से हिंदी साहित्य की सभी विधाओं में रचनाएँ आमंत्रित करते हैं। 15 फरवरी 2019 तक रचनाएँ हमें प्रेषित की जा सकती हैं। रचनाएँ नीचे दिए गये ई-मेल पर प्रेषित करें- editor.akshayagaurav@gmail.com
    अधिक जानकारी हेतु नीचे दिए गए लिंक पर जाएं !
    https://www.akshayagaurav.com/p/e-patrika-january-march-2019.html

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  7. Recent Post शब्दों की मुस्कराहट परतुमको छोड़ कर सब कुछ लिखूंगा

    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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कुछ अपने मन की कहते चलिए

नमस्ते