Saturday, 9 June 2018

गुलमोहर



दहकते नारंगी 
बेल-बूटे
कढ़े हुए हैं
उस पेड़ के
हरे उत्तरीय पर,
जिसके पास से
में रोज़ गुज़रता हूँ ।
मुस्कुराते हुए,
हाथ हिलाते हुए,
सोचते हुए...
कड़ी धूप में ही
खिलते हैं गुलमोहर ।
ये याद रहे ।

4 comments:

anmol mathur said...

Hare ped ke uttareey pe bel boote! Waah. Dil jeet liya baisa!

RADHA TIWARI said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (11-06-2018) को "रखना कभी न खोट" (चर्चा अंक-2998) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी

noopuram said...

दिलों को जीतने के वास्ते ही
गुलमोहर खिलते हैं राहों में.
ये ना हों तो सफ़र
बेरंग और बेनूर हो जाये.

धन्यवाद सा.

noopuram said...

धन्यवाद राधा जी.
आभारी हूँ.

नमस्ते