Thursday, 24 August 2017

बहनें ऐसी होती हैं




बहनें ऐसी होती हैं । 

बड़ी हों तो, 
हाथ के बुने 
स्वेटर के नरम फंदों जैसी, 
उम्मीदों के 
बेल - बूटे बुनती हैं ।
शीत के दिनों में, 
आग तापने जैसी , 
ममता की 
ऊष्मा देती हैं ।
बहनें ऐसी होती हैं । 

छोटी हों तो 
वर्षा की बूंदों का 
जलतरंग बन ,
जी बहलाये रहती हैं ।
खट्टी - मीठी गोली जैसी ,
जीवन में 
स्वाद बनाये रखती हैं ।
बहनें ऐसी होती हैं । 

हमउम्र हों तो 
हमजोली होती हैं ।
झूले की पेंग होती हैं ।
मन के ताल से छलकती ,
जीने की 
उमंग होती हैं ।
बहनें ऐसी होती हैं । 

बहनें 
दिन में सूरज की रोशनी ,
रात में चंदा की चांदनी होती हैं ,
बहनें बहुत अपनी होती हैं ।

बहनें 
अबूझ पहेली होती हैं ।
चुपचाप बलाएं ,
अपने सर ले लेती हैं ।
अच्छे दिनों में 
शीतल छाँव सी ,
आड़े वक़्त में 
ढाल बन जाती हैं ।
ज़िंदगी भर लड़ती - झगड़ती 
तंग करती हैं ,
और ज़रुरत पड़े तो 
दुनिया भर से 
लड़ पड़ती हैं ।
सुख में ठंडी बयार, 
दुःख में 
मीठी लोरी होती हैं । 
बहनें ऐसी होती हैं ।


2 comments:

  1. उम्दा ! शुभकामनाओं सहित ,आभार ''एकलव्य"

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  2. बहुत सुंदर!

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नमस्ते