Thursday, 27 July 2017

मैं एक मामूली मिट्टी का दिया




मैं एक मामूली 
मिट्टी का दिया हूँ ।

मैं मनोबल हूँ ।
जो अंतर में, 
अलख जगाये,
आस बँधाये ।

मैं एक सजग  
विचार हूँ ।
जो बीहड़ में 
राह बनाये ।

मैं जिजीविषा हूँ ।
जो हर हाल में, 
जीवन से 
लौ लगाये रखने का 
साहस दे ।

मैं अभय हूँ ।
जो अँधेरे और अज्ञान को
ललकारना सिखाये ।

मैं अंधकार के ललाट पर 
ज्योतिर्मय तिलक हूँ ।

मैं वंदना हूँ ।
जो सूर्य के प्रकाश की 
ऊष्मा अपने में समेटे 
दीपक राग बन जाये ।  

मैं एक मामूली 
मिट्टी का दिया हूँ ।  
       


12 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द" में सोमवार 31 जुलाई 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत आभार । मुंशी प्रेमचंद का नाम जिस पन्ने पर हो, उस पर रत्ती भर जगह पाना भी परम सौभाग्य है ।

      Delete
  2. surya saa prakash rakhne wala mamulee diya ...

    Apratim Rachna

    ReplyDelete
    Replies
    1. अनाम सराहना के लिए बहुत धन्यवाद ।
      पढ़ते रहिएगा ।

      Delete
  3. बहुत सुन्दर...

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद सुधा जी ।

      Delete
  4. अंधकार के ललाट पर ज्योतिर्मय तिलक.... बहुत खूब

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपको अच्छा लगा, जान कर अच्छा लगा ।
      आभार । पढ़ते रहिएगा ।

      Delete
  5. मैं अन्धकार के ललाट पर ज्योतिर्मय तिलक हूँ
    मैं मिट्टी का दिया ही सही पर देता को प्रकाश ही हूँ

    ReplyDelete
    Replies
    1. वाह ! धन्यवाद । बहुत सुंदर ।
      इसी तरह पढ़ती रहिएगा ।

      Delete
  6. बेहतरीन लेख .... तारीफ-ए-काबिल .... Share करने के लिए धन्यवाद...!! :) :)

    ReplyDelete
  7. कैसे जलकर दूसरों के लिए उजाला किया जाता है, यह दिए से बेहत्तर कौन समझा सकता है
    बहुत सुन्दर रचना

    ReplyDelete

नमस्ते