Sunday, 12 May 2013

कह डालो




बेबस दिल का गुबार निकालो ,
झट से इक कविता लिख डालो .
और किसी से कहो न कहो ,
कविता में सब कुछ कह डालो .

शब्दों को अपना मित्र बना लो .
भावों को सारथी बना लो .
मन के द्वन्द सकल मथ डालो .
कविता में सब कुछ कह डालो .

बासी बातों को धूप दिखा दो .
आस की चुनरी रंगवा लो .
स्मृतियों की गठरी खोल डालो .
कविता में सब कुछ कह डालो .

झाड - पोंछ कर साफ़ करा लो .
मन में पूजा का दीप जला लो .
जो लिखा वही नैवेद्य चढ़ा दो .
कविता में सब कुछ कह डालो .



6 comments:

mysay.in said...

recharging and energetic composition !!

राकेश श्रीवास्तव said...

अपने रंग में सब को रंग डालो.
सुन्दर कथन, कविता के बारे में.

Shams Noor Farooqi said...

हा हा! अच्छी है। पढ़ कर एक लम्हा को हंसी आ गई। सो यहाँ भी लिख दी। कविता पर की कई कविता!! दिल के ख़्याल जब सच्चाई से बाहर आते हैं, तो कविता ही तो बन जाते हैं। अगर दिल का दर्द ख़ून बन कर स्याही में न मिले और क़लम से होकर काग़ज़ पर न उभरे तो कहे की कविता।

बासी बातों को धूप दिखा दो / आस की चुनरी रंगवा लो – सब से ज़्यादा पसंद आया। बासी बातों को धूप दिखाना, इस पर सब से ज़्यादा हंसी आई। {हंसी आने से मेरा मतलब उस प्रसन्नता से है जो दिल में तो महसूस हो ही, साथ ही होठों व आखों में उभर भी आये।}

इतने सीधे सादे सच्चे एहसास कहाँ से ढूंढ लाती हैं आप। दिल का गुबार निकालने के लिए कविता लिखना अपने आप में ही बहुत सुंदर विचार है। सब झाड़ पोछ कर साफ़ हो गया। दिल मन मन्दिर हो गया। अंतिम पंक्तियों में क्या कल्पना है, मुझे नहीं पता। मगर जो मेरे दिल में विचार उभरा, वो यह कि अपने दिल की सारी बुराइयों / अशुद्धियों को (कविता बना कर) इकट्ठा किया और फिर पवित्र अग्नि (पूजा का दीपक) में उनकी आहुति दे दी। अशुद्धियाँ सारी जल कर राख हो गईं, और मन सदा के लिए पवित्र (ईश्वर का घर) हो गया। अति सुंदर। अति सुंदर।

श्री कृष्ण की कृपा हो आप पर। वह परम सत्य है। उसकी मुरली की तान में ही अनंत जीवन है। वह आप की रहनुमाई करे। खुश रहें। लिखती रहें।

noopuram said...

hamen hansi is baat par aayi ki aap jis tarah se kavita padhte hain aur apne vichar vyakt karte hain ..sochne aur samajhne ka silsila jaari rahta hai.its almost like you can read my thoughts and read between the lines too. aap apni taraf se ek soch aur ..ek khayal aur jod dete hain. I am lucky and privileged to receive your criticism. thank you.

noopuram said...

rakeshji dhanyawad and thank you my say.

Shams Noor Farooqi said...

thank you for your kind words Noopur. am honoured. may Lord bless you.

नमस्ते

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