Sunday, 18 September 2011

किताबें और खिलौने




जिस घर में
जगह नहीं,
किताबों
और खिलौनों
के लिए,
वो घर
बहुत छोटा है
रहने के लिए.

उस घर में
एक खिङकी
कम है,
बंजारन हवा की
चहलकदमी
के लिए,
आसमान की
चौङाई का
अंदाज़ा
लगाने के लिए,
बदलते मौसमों का
लेखा-जोखा
रखने के लिए,

उस घर में
जगह कम है,
सपनों की फसल
बोने के लिए,
नदी की तरह
अपने भीतर
बहने के लिए,
और छक कर
जीने के लिए.


1 comment:

  1. अच्छी लगी... ख़ासकर शुरू की पंक्तियाँ। चलती हवा के लिए बंजारन हवा की चहलक़दमी भी बहुत पसंद आया।

    ReplyDelete

नमस्ते