Monday, 12 July 2010

    



  दादी



दादी की यादें
दादी की बातें
मन से बंधी हैं
ताबीज़ की तरह.


दादी की बोली
दादी की ठिठोली
गाँठ से बंधी है
कमाई की तरह.


दादी की गोदी
दादी की थपकी
मन को समझाती है
लोरी की तरह.


दादी की झिड़की
दादी की उंगली
रास्ता दिखाती है
ध्रुव तारे की तरह.







nupuram@gmail.com

1 comment:

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा.

नमस्ते

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