शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

जीवन मुझे जी भर कर जीना है

जीवन का रस चखो ।

खूब काम करो ।
काम का मज़ा लो ।
जितना सीख सको,
जिससे सीख सको... सीखो ।
जीवन का रस चखो ।

अभी तो

मन की कई बातें,
कहनी और सुननी हैं ।
सोची-समझी बातें,
गुननी और करनी हैं ।

प्यार और मन्दिर का प्रसाद
बांटना है ।
तुलसी की चौपाइयों को
आत्मसात करना है ।

भाग्य का लिखा
बांचना है ।
जो लिखा है उसे
वश में करना है ।

मन को साधना है ।
अपने लक्ष्य को पाना है ।

जी भर कर
गाना-गुनगुनाना है ।
कलेजे की हूक को
कोयल की कूक
बनाना है ।

जहाँ हिम्मत टूटे ..
पांव फिसले ..

संभल कर - तुरंत
बिना बात
ढोलक की थाप
पर
झूम कर
ठुमका लगाना है ।

खुशहाली के बीज
बोना है ।
उम्मीद की कोपलों को
सींचना - सहलाना है ।

जीवन के कैनवस में
रंग भरना है ।
अनुभूति के
हर रंग में
रंगना है ।

इस क्षण को जीना है ।
हर क्षण में जीवन पिरोना है ।

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