छत पर सूखते कपङे
आङे-तिरछे कोण धूप के
रसोई में पकती दाल
पेट भर तरकारी अनाज ,
नयन भर खुला आकाश
खिङकी तक आती डाल
डाल पर खिला पीला फूल
झूला झूलती गौरैया मगन,
स्कूल के बस्ते में किताब
खेलते-कूदते बढते बच्चे
नलों में पानी सुबह-शाम
बस-ट्रेन,रिक्शे की सवारी,
रात भर की गहरी नींद
रेडियो पर समाचार,गीत
हँसते-बोलते गाते रिश्ते
आते-जाते सलाम-नमस्ते ,
ज़िन्दगी इतना सब जीते हुए
जाने कब सर्राटे से बीत गई ।
ढूँढने की फ़ुरसत ही नहीं मिली
जिसे कहते हैं लोग सारे खुशी !
शनिवार, 21 मार्च 2026
खुशी मिली
गुरुवार, 19 मार्च 2026
मिलनसार किरायेदार गौरैया
ठुमक-ठुमक परकोटे पर
फुदक फुदक छज्जे पर
बेनागा रोज़ाना आती ।
चहचहा हर सुबह जगाती ।
छप-छप-छप जल से खेलती,
दाना चुग चुग खुशी मनाती ।
चोंच में तिनके सुतली,टहनी
काग़ज़, पत्ते बटोर ले जाती,
घोंसला बना कर घर बसाती ।
सीधी-सादी सी मनभाती गौरैया
मिलनसार किरायेदार बन जाती ।
कीट-कीटाणु सफ़ाचट करती,
आबोहवा स्वच्छ कर देती ।
यानी पेशगी किराया दे देती !
दिनचर्या से ऐसी जुङ जाती,
सुबह-साँझ उसके कहे आती ।
शुभ वेला का स्मरण कराती ।
आस की पाती मनमौजी गौरैया
घर में घर कितना सा बनाती ?
चहल-पहल से अपनी चिमणी
दिल में गहरे घर कर जाती ।
एक तथ्य है सर्व विदित सर्वत्र
आदमी की धङकन सम पर
स्वत: ले आती जब-जब कोई
गौरैया सी चिरैया चहचहाती ।
एक अकेले फूल की शुभकामना
विध्वंस का कर्णभेदी कोलाहल
चारों दिशाओं में मचा हाहाकार
अहंकार परस्पर रहा ललकार
ये सृष्टि को कदापि नहीं स्वीकार
कष्ट ही देगा संवेदनहीन व्यापार
सद्भाव का स्वर ही वह पतवार
जो जीवन की नैया लगाएगा पार
जीवट मनुष्य का स्थायी आधार
शुभ संकल्प ही दिखाता रास्ता
साहस का दीप ह्रदय में बालता
मलबे में दब मरा नहीं जो पौधा
एकमात्र श्वेत फूल उस पर खिला
यदि उस शुभ्र पुष्प पर मन अटका
तो बदल जाएगी सोच की धारा
हर नाव ढूँढती है सुरक्षित किनारा
चुनौतियों से डिगता नहीं ध्रुव तारा